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Thursday, 4 February 2016

पठानकोट जांच पर पाक के पैंतरे पर हैरानी नहीं होनी चाहिए

इस पर किसी को हैरानी नहीं हुई कि पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले की जांच में पाकिस्तान ने नया पैंतरा दिखा दिया है। अब पाकिस्तान का कहना है कि सबूतों के अभाव में अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। इसके पहले भारत ने पाकिस्तान को जो सबूत उपलब्ध कराए थे वे नाकाफी करार दिए गए हैं। ऐसे में वह इसे आगे बढ़ाने के लिए भारत से और सबूत व सुराग की मांग करेगा। पता नहीं भारत उसे और सबूत देगा या नहीं, लेकिन यदि वह ऐसा करता भी है तो इसी की आशंका ज्यादा है कि वे भी आधे-अधूरे करार दिए जाएंगे, ठीक वैसे ही जैसे मुंबई 26/11 हमले के मामले में करार दिए गए हैं। यह खुलासा ऐसे वक्त हुआ है जब दो दिन पहले प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने वादा किया था कि जांच के नतीजे जल्द सार्वजनिक किए जाएंगे। उन्होंने कहा था कि जांच के नतीजे जो भी होंगे हम उन्हें दुनिया के सामने रखेंगे। मामले की जांच कर रही छह सदस्यीय पाकिस्तानी टीम ने अपने विदेश मंत्रालय को भारत की ओर से और सबूत मांगने के लिए पत्र लिखा है। विडंबना देखिए कि पठानकोट हमले के जिस मास्टरमाइंड जैश--मोहम्मद के संस्थापक मसूद अजहर के खिलाफ जांच की जा रही है वह उल्टा पाकिस्तान को कैसे धमका रहा है। मसूद अजहर ने धमकी दी है कि पाकिस्तान अगर भारत के खिलाफ आतंकी गुटों के ऑपरेशंस को बंद करता है तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। मसूद ने पेशावर बेस्ड जेहादी मैग्जीन अल-कलाम में लिखा है कि मैंने एक आर्मी बनाई है जो मौत से बेइंतहा मोहब्बत करती है। इस आर्मी को उखाड़ फेंकने की ताकत हमारे दुश्मनों में नहीं है। अल्लाह चाहता है कि यह आर्मी हमारे दुश्मनों के जश्न का इंतजार न करे और न ही मेरे नहीं होने का गम हो। मसूद अजहर ने पठानकोट हमले के बाद पाकिस्तान पर पहली बार खुलकर बोला है। उसने लिखा है कि पाकिस्तान की मस्जिदों, मदरसों और जेहादियों के खिलाफ कार्रवाई उसकी एकता के खिलाफ है और पाकिस्तान का ऐसा करना अपने ही पांव पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है। क्या यह अजीब नहीं है कि पठानकोट के हमले की साजिश पाकिस्तान में ही रची गई, आतंकी वहीं से आए और उन्होंने फोन पर बात भी वहीं की, लेकिन पाकिस्तान को और सबूत चाहिए? मसूद अजहर खुलकर भारत के खिलाफ जहर उगल रहा है। अभी तक इसके भी कोई प्रमाण सामने नहीं आए कि मसूद अजहर को नजरबंद किया गया है। पाकिस्तान कहता है कि हमने अपनी मीडिया में आतंकी संगठनों के प्रचार-प्रसार पर रोक लगा दी है। आखिर यह कैसा प्रतिबंध है जो मसूद अजहर पर लागू नहीं दिख रहा है? सवाल यह भी है कि पाकिस्तान न तो मसूद अजहर, हाफिज सईद व लखवी पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं कर पा रहा है? भारत सरकार पता नहीं पाकिस्तान पर इतना भरोसा क्यों करे बैठी है? शायद वह समझती है कि अमेरिकी दबाव के चलते पाकिस्तान की इन जेहादियों पर कार्रवाई करने की मजबूरी बन जाए। पर ऐसा होने की संभावना बहुत कम है क्योंकि यह जेहादी खुद पाकिस्तानी सेना व आईएसआई की देन हैं और इन्हें जिन्दा रखने, हर प्रकार की मदद देना पाकिस्तान की मजबूरी है। बेशक मियां नवाज शरीफ कुछ भी कहें पर दुनिया जानती है कि पाकिस्तान में असल शक्ति किसके हाथों में है। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोचते हैं और उम्मीद करते हैं कि उनकी लाहौर यात्रा के सकारात्मक परिणाम आएंगे। पर नवाज चाहते हुए भी बेबस हैं। पाकिस्तान एक बार फिर बेनकाब हुआ है। पाकिस्तान से बातचीत हो या न हो, ज्यादा जरूरी यह है कि उसकी सेना और खुफिया एजेंसी (आईएसआई) के संरक्षण वाले आतंकी संगठन भारत में नए सिरे से कोई वारदात न कर पाएं और यदि करें तो उन्हें सचमुच मुंहतोड़ जवाब देना होगा।

-अनिल नरेन्द्र

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