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Thursday, 5 May 2016

...और अब नवीन जिंदल कठघरे में

कांग्रेस की सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि अपने 60 साल के शासन में उसका का दामन भ्रष्टाचार और घोटालों से भरा हुआ है। वह अच्छी तरह जानती है कि भ्रष्टाचार, दलाली और रिश्वतखोरी जैसी चेजें उसकी पहचान बनती जा रही हैं। रिश्वतखोरी व दलाली और गलत तरीकें से पैसा कमाना उसकी संस्कृति रही है। यूपीए-घ् के सफल शासन के बावजूद यूपीए-घ्घ् में हुए 2जी, कॉमनवेल्थ गेम्स, कोलगेट स्कैम जैसी चीजों के चलते यूपीए सरकार को अंतत जाना पड़ा। एक तरफ अगस्ता हेलीकाप्टर दलाली का मामला चल रहा है तो दूसरी तरफ बहुचर्चित कोल ब्लाक आवंटन घोटाले से जुड़े एक मामले में पटियाला हाउस की विशेष सीबीआई अदालत ने गत दिनों कांग्रेस नेता नवीन जिंदल सहित 14 लोगों के खिलाफ आरोप तय करने के आदेश दिए हैं। इन 14 लोगों में पूर्व कोयला राज्यमंत्री दसारी नारायण राव, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, पूर्व कोयला सचिव एचसी गुप्ता के नाम भी शामिल हैं। विशेष सीबीआई जज पराशर ने आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 120 बी (आपराधिक षडयंत्र), 420 (धोखाधड़ी), 409 (सरकारी कर्मचारी द्वारा आपराधिक विश्वासघात) व भ्रष्टचार निरोधक अधिनियम की धारा 13(1), (सी) 13 (1) डी के तहत आरोप तय करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने 136 पेज के अपने आदेश में कहा कि पथम दृष्टि यह पता चलता है कि पूरे षड्यंत्र में नवीन जिंदल ने मुख्य भूमिका निभाई। कई मुखौटा कंपनी बनाई गईं जो महज एक छलावा थीं। ऐसा केवल पूर्व कोयला राज्यमंत्री दसारी नारायण राव को दो करोड़ रुपए देने के अवैध कार्य को सही दिखाने के लिए किया गया। अदालत ने कहा कि झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने कोयला मंत्रालय से अनुशंसा करके इस बात को सुनिश्चित किया था कि समूचे अमरकोंडा, मुर्गादंगल कोयला ब्लॉक का आवंटन आरोपी उद्योगपति नवीन जिंदल के समूह की कंपनी को मिले। इस कम में अदालत ने कहा कि पथम दृष्टया कोड़ा का व्यवहार नवीन जिंदल और कोड़ा के बीच सहमति का दिखता है ताकि झारखंड सरकार की ओर से कोयला ब्लॉक के आवंटन की सिफारिश आरोपी कंपनी जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड और गगन स्पॉन्ज आयरन पाइवेट लिमिटेड के पक्ष में की जा सके। जिंदल के अलावा कोई अन्य इससे लाभान्वित भी नहीं था। इनका इस्तेमाल इस तरह से रकम ट्रांसफर करने के लिए किया गया ताकि देश के किसी भी कानून के तहत यह चोरी न पकड़ी जा सके। विशेष सीबीआई जज पराशर ने कहा कि मधु कोड़ा के पास झारखंड के मुख्य सचिव व अन्य अधिकारियों ने फाइल को स्वीकृति के लिए भेजा था। मुख्यमंत्री ने अपने राजनीतिक फायदे के लिए उनकी सिफारिशों को मानने से इंकार करते हुए उसमें बदलाव करने को कहा। जब अधिकारियों ने बदलाव करने से मना कर दिया तो उन्होंने स्वयं ही अपनी पसंदीदा कंपनी का नाम लिस्ट में डाल दिया। हालांकि अदालत ने कहा कि कोड़ा ने अपने पद का दुरुपयोग किया या नहीं यह केवल ट्रायल के दौरान ही सामने आ सकता है। अदालत ने कहा कि तथ्यों से पता चलता है कि सभी किरदारों के सूत्रपात केवल नवीन जिंदल ही हैं। पूरे मामले में कांग्रेस की छवि को एक और आघात लगा है। चाहे मामला अगस्ता हेलीकॉप्टर दलाली का हो या कोल ब्लाक आवंटन का, कांग्रेस की इमेज को धक्का लग रहा है। सबसे बड़ी दिक्कत कांग्रेस के लिए जनता की परसेप्शन का है। अगस्ता दलाली केस व जिंदल के केस में आरोप कितने सिद्ध होते हैं या नही, यह तो बाद की बात है पर असल मुद्दा है कि जनता की नजरों में कांग्रेस भ्रष्ट है जो भ्रष्टाचार दलाली को बढ़ावा देती है।

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