Wednesday, 27 June 2018

अमित शाह का 400 सीटें जीतने का लक्ष्य

मोदी सरकार के केंद्र की सत्ता में चार साल पूरे करने के साथ ही भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह से चुनावी मोड में आ गई है। 2019 में दिल्ली की सत्ता पर एक बार फिर अपनी दावेदारी ठोकने के लिए भाजपा ने नया नारा गढ़ा हैöसाफ नीयत सही विकास, 2019 में एक बार फिर मोदी सरकार। 2019 में पार्टी की निगाहें लोकसभा की 80 ऐसी सीटों पर रहेंगी जहां वह 2014 में जीत दर्ज करने में सफल नहीं हो सकी थी। भाजपा ने लोकसभा चुनाव में 400 सीट जीतने का लक्ष्य तय किया है। मिशन 2019 के लिए पार्टी का खास फोकस पूर्वोत्तर राज्यों पर रहने की उम्मीद है। अमित शाह ने संगठन मंत्रियों के साथ मंथन शिविर में करीब आठ घंटे तक उन्हें 2019 लोकसभा चुनाव की जीत का मंत्र दिया। शाह ने वर्तमान सांसदों की रिपोर्ट कार्ड तैयार करने का फॉर्मेट भी दिया। उन्होंने कहा कि इसी फॉर्मेट के आधार पर जनता से सांसदों का फीडबैक लेकर रिपोर्ट कार्ड तैयार करें। मोदी सरकार और भाजपा के लिए 2019 के लक्ष्य को हासिल करने के रास्ते में अभी कई अड़चनें हैं। जैसा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदम्बरम ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था की हालत ठीक नहीं कही जा सकती। अर्थव्यवस्था के चार टायरों में से तीन टायर निर्यात, निजी निवेश और निजी उपभोग पंक्चर हैं। पी. चिदम्बरम ने कहा कि जिन चार टायरों के आधार पर अर्थव्यवस्था चलती है उनमें से तीन टायर पंक्चर हो चुके हैं। यह भी आरोप लगाया कि यह स्थिति सरकार की नीतिगत गलतियों और गलत कदमों के कारण पैदा हुई हैं। कृषि, जीडीपी, रोजगार सृजन, व्यापार और अर्थव्यवस्था के कुछ दूसरे मानकों के आधार पर मोदी सरकार पिछले चार सालों में खरी नहीं उतरी। जीएसटी को गलत ढंग से लागू करने की वजह आज भी कारोबार को प्रभावित कर रही है। एक सर्वे के अनुसार जीएसटी और नोटबंदी के कारण लगभग 15 लाख लोग बेरोजगार हो गए हैं। किसान अलग परेशान हैं। किसान समर्थन मूल्य के मुताबिक उपज के दाम न मिलने पर आंदोलन कर रहे हैं। रिजर्व बैंक के सर्वेक्षण के मुताबिक 48 प्रतिशत लोगों ने माना है कि अर्थव्यवस्था की हालत खराब हुई है। पेट्रोल-डीजल की बेतहाशा वृद्धि के कारण आज महंगाई आसमान छू रही है। याद रहे कि अच्छे दिन के वादे के तहत दो करोड़ नौकरियों का वादा किया गया था, लेकिन कुछ हजार नौकरियां ही पैदा हो सकीं। 2015-16 में विकास दर 8.2 प्रतिशत से घटकर 2017-18 में 6.7 प्रतिशत रह गई। पिछले चार वर्षों में एनपीए 2,63,000 करोड़ रुपए से बढ़कर 10,30,000 करोड़ रुपए हो गया और आगे और बढ़ेगा। सार्वजनिक बैंकों की हालत बद से बदतर होती जा रही है। एनडीए के सहयोगियों और भाजपा के कथाकथित असंतुष्टों की अलग समस्या पैदा हो गई है। शिवसेना ने हमेशा की तरह भाजपा को निशाना बनाने के लिए अपने मुखपत्र `सामना' का इस्तेमाल किया है। उसने सामना के संपादकीय में भाजपा पर तेज हमला करते हुए आरोप लगाया कि अराजकता फैलाने के बाद भगवा दल जम्मू-कश्मीर में सत्ता से बाहर हो गया और उसने जो लालच दिखाया है उसके लिए इतिहास उसे कभी माफ नहीं करेगा। शिवसेना ने भाजपा के कदम की तुलना अंग्रेजों के भारत छोड़कर जाने से की। उसने कहा कि जब भाजपा इस उत्तरी राज्य में आतंक और हिंसा पर लगाम नहीं लगा पाई तो अपना ठीकरा पीडीपी पर फोड़ दिया। देश चलाना बच्चों का खेल नहीं है। भाजपा ने जम्मू-कश्मीर के हालात को इस बेमेल गठजोड़ की सरकार के कारण इसकी हालत वर्ष 1990 की स्थिति तक पहुंचा दिया है। मगर 1990 में जम्मू के हालात इतने खराब नहीं थे। जम्मू-कश्मीरी पंडित जो अपने ही देश में शरणार्थी बन गए थे उनकी शरणस्थली था। मगर आज जम्मू के लोग घरों से बेघर हो रहे हैं। बच्चों को स्कूलों से निकालना पड़ रहा है और रियासतें जम्मू-कश्मीर की सरकार सरहद पर रहने वाले जम्मू निवासियों की तरफ से इतनी संगदिल हो गई है कि पाकिस्तान के हमलों में मारे गए लोगों को एम्बुलैंस तक नहीं मुहैया करवाई। सीमावर्ती लोगों को अपने प्रियजनों की लाशों को ट्रैक्टरों में उठाकर लाना पड़ा। जम्मू के लोगों ने भाजपा को दिल खोलकर बहुमत दिया था मगर भाजपा ने उन्हें बहुत निराश किया और जम्मू के हिन्दुओं की अपेक्षा का असर शेष भारत के हिन्दुओं पर भी पड़ा है। उत्तर प्रदेश में और केंद्र में दोनों जगह भाजपा की सरकार है पर पिछले चार वर्षों में अयोध्या में राम मंदिर बनाने के वादे का कुछ नहीं हुआ। जिन मुद्दों को लेकर भाजपा सत्ता में आई थी वह सब आज भी अधर में हैं। लोकसभा में पीडीपी का सिर्प एक सांसद होने के कारण भाजपा-पीडीपी गठबंधन टूटने से राजग पर खास फर्प नहीं पड़ेगा। हालांकि राजग के सहयोगी दलों की संख्या जरूर घट जाएगी। साथ ही अब 19 राज्यों में ही राजग सरकारें बची हैं। वहीं पीडीपी के अलग होने के बाद भाजपा के सहयोगियों को शिकायत का एक और मौका मिल गया है कि वह राजग के घटक दलों से अच्छा सुलूक नहीं करती है। एनडीए में 47 सदस्य दल हैं। पर तेदेपा व पीडीपी के राजग से अलग होने के बाद लोकसभा में प्रतिनिधित्व करने वाले केवल 11 दल ही बचे हैं। राजग में शामिल दक्षिण और पूर्वोत्तर के चार दलों के पास केवल एक सांसद है। मैंने इस लेख में वह सब चुनौतियों का जिक्र किया है जो भाजपा को 2019 के चुनाव में निपटना पड़ सकती है। अमित शाह को चाणक्य कहा जाता है। उम्मीद की जाती है कि वह इन चुनौतियों पर भारी पड़ेंगे और मोदी को 2019 में फिर से सत्ता में लाने में सफल रहेंगे।

-अनिल नरेन्द्र

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