Saturday, 23 June 2018

नौ दिन में चले अढ़ाई कोस

नौ दिन में चले अढ़ाई कोस। जी हां, बिल्कुल यही कहावत दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और उनके मंत्रियों पर सटीक बैठती है। दिल्ली के सियासी गलियारों में नौ दिनों तक चला हठ योग तो समाप्त हो गया। लेकिन इसने इस कहावत को पूरी तरह चरितार्थ कर दिया कि वाकई दिल्ली सरकार नौ दिन में चली अढ़ाई कोस। इस सियासी ड्रामे में हर कोई अपनी जीत के दावे कर रहा है लेकिन सवाल वही है कि इन नौ दिन के धरने से आखिर हासिल क्या हुआ? जो अपील इन नौ दिनों के धरने के बाद अधिकारियों से की गई वो चार महीने पहले क्या नहीं हो सकती थी? यह सब पहले भी हो सकता था बस फिर दिल्ली सरकार को एलजी के सोफे पर पसरने का मौका भला कैसा मिलता? अधिकारी भी तो अपना महत्व समझाते तो भला कैसे? चलो देर आए दुरुस्त आए। न तो यह इन सियासी गलियारों का पहला स्ट्रीट प्ले था और न ही आखिरी। दिल्ली में इस समय इस बात की बहस भी हो रही है कि काम कौन कर रहा है? सरकार काम नहीं कर रही और इसकी वजह से अधिकारी काम नहीं कर रहे। दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट के अनुसार कि विभिन्न विभागों में 181 फाइलें मंत्रियों के पास स्वीकृति के लिए पेन्डिंग पड़ी थीं। जो उनके टेबल में धूल चाट रही थीं। इनमें परिवहन विभाग की 81 अतिमहत्वपूर्ण फाइलें शामिल हैं। इस विभाग के मंत्री कैलाश गहलोत हैं। जब ये मंत्री बने थे तो दावा कर रहे थे कि परिवहन के क्षेत्र में क्रांति लाएंगे। मगर इनकी स्थिति सबसे खराब है। गौरतलब है कि दिल्ली सरकार के मंत्री बार-बार आरोप लगा रहे हैं कि अधिकारी उनके साथ सहयोग नहीं कर रहे हैं, जबकि कई महत्वपूर्ण योजनाओं की फाइलें उन्हीं के पास पड़ी हैं। अब फाइलें क्लीयर होनी शुरू हुई हैं। पर पेन्डिंग फाइलों के निपटारे में भी तो समय लगेगा। अब बात करते हैं खुद मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की। धरने के दौरान कथित तौर पर खानपान में गड़बड़ी से उनका शर्परा बढ़ गया है। लिहाजा इलाज के लिए बेंगलुरु जा रहे हैं। मुख्यमंत्री मधुमेह के मरीज हैं और पहले भी इनका इलाज बेंगलुरु स्थित प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र, जिन्दल फार्म में होता रहा है। पार्टी के बागी विधायक कपिल मिश्रा ने भी ट्वीट कर मुख्यमंत्री के इलाज के लिए 10 दिनों के लिए शहर से बाहर जाने की बात लिखी है। उन्होंने मुख्यमंत्री पर दिल्ली के लोगों को ठगने का आरोप लगाया। दूसरी ओर विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेन्द्र गुप्ता ने भी तंज कसा कि मुख्यमंत्री ने दिल्ली की जनता के साथ विश्वासघात किया है। उन्होंने कहा कि यह बड़ा दिलचस्प है कि उधर धरना खत्म हुआ और इधर छुट्टी शुरू हो गई। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले साढ़े चार महीने में मुख्यमंत्री महज 15 दिन के लिए अपने कार्यालय आए। दूसरी ओर आप सरकार को लेकर नौकरशाही की नाराजगी अब भी बरकरार है, अधिकारियों का कहना है कि वह डिप्टी सीएम के साथ मीटिंग नहीं करेंगे।

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