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Friday, 19 September 2014

ब्रिटेन टूटने की कगार पर, स्काटलैंड अलग होने पर उतारू

एक जमाना था जब ग्रेट ब्रिटेन का झंडा आधी दुनिया में छाया रहता था। अंग्रेज कहते थे कि हमारे राज में सूरज कभी नहीं डूबता। आज यूके लगभग टूट चुका है। इंग्लैंड, वेल्स और स्काटलैंड को मिलाकर बनता है ग्रेट ब्रिटेन। कई दशकों से कुछ नेशनलिस्ट मांग कर रहे हैं कि स्काटलैंड को एक आजाद देश होना चाहिए क्योंकि स्काटलैंड की अलग सभ्यता और संस्कृति है, अलग पहचान है। वे लोग मानते हैं कि संस्कृति (कल्चर) और एजुकेशन में उसका लेवल इंग्लैंड से पीछे नहीं बल्कि आगे है। कुछ बरस  पहले यूनेस्को ने पहली `सिटी ऑफ लिटरेचर' चुना तो स्काटलैंड की राजधानी ने लंदन और ऑक्सफोर्ड को पीछे छोड़ दिया। स्काटलैंड पहले आजाद देश था। 1603 में वेल्स और स्काटलैंड ने इंग्लैंड के साथ मिलकर एक नया देश बनाया जाना मंजूर किया था। 1707 में स्काटलैंड इंग्लैंड में शामिल हुआ और नए राज्य को यूनाइटेड किंग्डम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन नाम दिया गया। पिछले कई वर्षों से स्काटलैंड में आजादी की मांग जोर से उठने लगी। अब स्काटलैंड में एक जनमत संग्रह होने जा रहा है जो तय करेगा कि स्काटलैंड ब्रिटेन में रहेगा या नहीं। ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने स्काटलैंड की जनता से जनमत संग्रह में  ब्रिटेन में बने रहने का विकल्प चुनने की अपील की है। उन्होंने कहा कि 307 साल से चले आ रहे इस गठजोड़ को तोड़ने से सभी को नुकसान होगा। कैमरन ने यह वादा भी किया कि ब्रिटेन को एक साथ रखने के लिए उनकी सरकार से जो भी बन पड़ेगा वह करेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह स्काटलैंड जाकर एकता के लिए अभियान चलाएंगे। उन्होंने कहा कि मैं इस समय संसद में बैठने के  बजाय  स्काटिश जनता के बीच जाकर सुनना चाहता हूं। वह हमारे साथ रहें या न रहें, इसका फैसला उन्हें करना है। मगर मैं  ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के तौर पर उन्हें पूरे देश की जनता की आवाज पहुंचाऊंगा कि हम चाहते हैं कि वह हमारे साथ रहें। यदि स्काटलैंड की जनता आजादी के पक्ष में मतदान करती है तो कैमरन के पद पर भी आंच आएगी। देश को एक रखने की मुहिम में पूर्व पीएम और मूल रूप से स्काटिश नेता गार्डन ब्राउन भी उतर आए हैं। उन्होंने स्काटलैंड की संसद को दी जाने वाली नई ताकतों के लिए समयसीमा का ऐलान किया। इस बीच सांसदों के एक दल ने महारानी एलिजाबेथ द्वितीय से दखल देकर देश को टूटने से बचाने की अपील की है। 18 सितम्बर को 40 लाख से ज्यादा स्काट तय करेंगे कि वे इंग्लैंड के साथ रहना चाहते हैं या नहीं? हालांकि ब्रिटेन ने स्काटलैंड को धमकी भी दी है कि अगर वह अलग होगा तो उसका ब्रिटेन के साथ आर्थिक संबंध भी खत्म हो जाएगा। अगर स्काटलैंड ब्रिटेन से अलग होने के लिए मतदान करता है तो यह ब्रिटेन के लिए एक बहुत बड़ा झटका होगा। जैसे मैंने कहा कि वह माइटी ब्रिटिश एम्पायर जहां सूरज कभी नहीं डूबता था छिन्न-भिन्न होकर सिकुड़ती जा रही है। देखें स्काटलैंड की जनता ब्रिटेन के साथ रहती है या नहीं?

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