Saturday, 25 June 2016

पाक सूबे सरकार ने दिए 30 करोड़ रुपए आतंकी फैक्ट्री को

अमेरिका के रक्षा विभाग पेंटागन ने अपनी छमाही रिपोर्ट में कहा है कि पाकिस्तान में आतंकवादियों की पनाहगाहें बनी हुई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका लगातार पाकिस्तान के साथ उन कदमों के बारे में स्पष्ट रहा है, जो उसे सुरक्षा का माहौल सुधारने और आतंकियों और चरमपंथी समूहों को सुरक्षित ठिकाने न मिलने देने के  लिए उठाने चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया  है कि इसकी वजह से सुरक्षा और अफगानिस्तान में स्थिरता की वार्ता तो प्रभावित होती ही है साथ-साथ सुरक्षा सहयोग जैसे अन्य मुद्दों की चर्चा के दौरान अमेरिका-पाकिस्तान द्विपक्षीय संबंध पर भी असर पड़ता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हैरानी की बात है कि ओसामा बिन लादेन को छिपाए जाने की घटना के बाद पाकिस्तान में सीआईए के सेक्शन प्रमुख को जहर दे दिया जाता है। वह अमेरिका वापस आ गए। उनका और सीआईए का मानना है कि उन्हें पाकिस्तानी आईएसआई ने जहर दिया। मैं उनसे सहमत हूं। पाकिस्तान हर किसी के साथ खेल रहा है। उन्होंने कहा कि हमारा धन लेकर यह आईएसआई के हाथों से होता हुआ अंतत उस तालिबान और अफगानिस्तान के हाथ में जाता है जो अमेरिकियों की हत्या कर रहे हैं। आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले पाकिस्तान का चेहरा एक बार फिर बेनकाब हुआ है। वहां की खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की सरकार ने अपने बजट में अफगान तालिबान से जुड़े एक मदरसे को 30 करोड़ रुपए का अनुदान दिया है। इस मदरसे को आतंक की फैक्ट्री के तौर पर माना जाता है। तालिबान अफगान के पूर्व सरगना मुल्ला उमर समेत कई शीर्ष आतंकी वहां के छात्र रह चुके हैं। यह घोषणा सूबे के वित्तमंत्री शाही फरमान ने विधानसभा में बजट पेश करते हुए की। तालिबान अफगानिस्तान से जुड़े ये मदरसे जेहादियों की यूनिवर्सिटी कहलाते हैं। वित्तमंत्री ने कहाöमैं गर्व के साथ घोषणा करता हूं कि दारुल हक्कानिया नौशेरा को सालाना खर्च के लिए 30 करोड़ रुपए दिए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान को अमेरिकी मदद (आर्थिक) पर संकट इसी हक्कानी नेटवर्प की वजह से है। तालिबान के पूर्व सरगना मुल्ला उमर को इसी मदरसे से डॉक्ट्रेट की मानद उपाधि मिली है। मदरसे के पूर्व छात्रों में हक्कानी नेटवर्प के संस्थापक जलालुद्दीन हक्कानी, भारतीय उपमहाद्वीप में अलकायदा का सरगना असीम उमर और अफगान तालिबान का सरगना मुल्ला अख्तर मंसूर शामिल हैं। हैरानी तो इस बात पर है कि अमेरिका सब कुछ जानते हुए भी, समझते हुए भी पाकिस्तान को आर्थिक मदद करता है। पाकिस्तान इस मामले को छिपाता भी नहीं है। यह है अमेरिका की वॉर ऑन टेरर की लड़ाई का दोहरा चेहरा।
-अनिल नरेन्द्र


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