Monday, 13 June 2016

तीन तलाक के खिलाफ मुस्लिमों में बनता माहौल

देश में तीन तलाक की प्रथा पर बैन करने का माहौल बनने लगा है और यह मांग मुस्लिम महिलाओं में तेजी पकड़ रही है। भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की ओर से तैयार की गई एक याचिका पर 50 हजार से ज्यादा मुस्लिम महिला और पुरुष साइन कर चुके हैं, जिसमें इस चलन पर रोक लगाने की मांग की गई है। जुबानी तलाक की इस व्यवस्था के साथ अगर `निकाह हलाला' को भी जोड़कर देखें तो मुस्लिम महिलाओं की बदहाली का अंदाजा  हो सकता है। निकाह हलाला वह व्यवस्था है, जिसके मुताबिक मौखिक ही सही पर एक बार तलाक हो जाने के बाद कोई महिला अपने पति के साथ तब तक नहीं रह सकती, जब तक वह किसी और से शादी न कर ले और फिर वह व्यक्ति उसे तलाक न दे दे। इन दोनों व्यवस्थाओं ने परिवार में मुस्लिम महिलाओं की स्थिति बहुत कमजोर बना दी है। आज के इस आधुनिक दौर में ऐसे रिवाजों के पक्ष में कहने को कुछ खास नहीं है लेकिन समाज का एक छोटा हिस्सा इस दलील के साथ इसे रोकने की कोशिशों का विरोध करता है कि मजहब के अंदरुनी मामले में हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। हालांकि तीन तलाक खत्म करने की मांग भी कहीं बाहर से नहीं, इस्लाम के अंदर से ही हो रही है। इससे पीड़ित महिलाएं न केवल मुस्लिम समाज का अभिन्न अंग है, बल्कि इस देश की सम्मानित नागरिक भी हैं। उनके अपने संवैधानिक अधिकार हैं, जिनसे उन्हें वंचित नहीं किया जा सकता। ट्रिपल तलाक यानि तीन बार तलाक पर प्रतिबंध लगाने संबंधी याचिका पर करीब 50 हजार मुस्लिम दस्तखत कर चुके हैं। भारतीय महिला आंदोलन द्वारा दायर की गई इस याचिका में राष्ट्रीय महिला आयोग से मांग की गई है कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करे और कुरान के विपरीत चली आ रही इस प्रथा को खत्म करवाए। सोशल मीडिया के माध्यम से तीन तलाक देने पर शुरू हुई बहस को कानपुर की शिया महिला काजी डॉ. हिना जहीर नकवी ने अमान्य करार दिया है। उनका कहना है कि सबसे पहले तलाक गैर पसंदीदा अमल है। इसके अलावा असामान्य मानसिक स्थिति और सोशल मीडिया में दिया गया तलाक नहीं माना जा सकता है। कुरान--पाक में तलाक पर हर बात साफ है। नकवी ने गुरुवार को मांग की कि पीएम नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार इस मामले में दखल दे। नकवी ने इस प्रथा पर तत्काल प्रभाव से बैन लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मौखिक तौर पर तलाक देने की प्रथा का गलत इस्तेमाल हुआ है। इसने मुस्लिम महिलाओं की जिन्दगी खतरे में डाल दी है। इससे सिर्प तलाक को ही बढ़ावा मिलता है। नकवी ने कहाöमैं तीन तलाक की पूरी तरह से निन्दा करती हूं। यहां तक कि कुरान में इस तरह का कोई निर्देश नहीं दिया गया जिससे मौखिक तलाक को बढ़ावा दिया जाए।

1 comment:

  1. ट्रिपल तलाक इस्लाम में एक आवश्यक धार्मिक प्रथा नहीं है

    ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में ट्रिपल तलाक पर प्रतिबंध लगाने की मांग की एक याचिका दायर किया है जिसमे ईमेल, एसएमएस पर या डाक द्वारा दिया जाने वाला तलाक़ शामिल है।

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