Friday, 17 June 2016

बगदादी के मरने से ज्यादा महत्वपूर्ण उसकी विचारधारा है

एक बार फिर खबर आई है कि दुनिया का सबसे खतरनाक और वांछित आतंकवादी सरगना अबु बक्र अल बगदादी सीरिया के रक्का शहर में एक हवाई हमले में मारा गया है। वैसे यह पहली बार नहीं जब बगदादी के मरने की खबर उड़ी है। 2 दिसम्बर 2012 को बगदादी की गिरफ्तारी का दावा झूठा निकला था। फिर अक्तूबर 2014 में खबर आई कि वह अल रक्का में घायल हो गया है। उसी साल नवम्बर में मोसुल हवाई  हमले में उसके मारे जाने की खबर आई। 20 जनवरी 2015 में अल कैम क्षेत्र के हमले में घायल होने की खबर आई। 8 फरवरी 2015 को जार्डन की बमबारी के बाद रक्का से मोसुल भागा। 9 जून 2015 को इराकी हमले में एक बार फिर खबर आई। इस बार ईरान और तुर्की मीडिया ने आईएस से जुड़ी न्यूज एजेंसी अल-अमाक के हवाले से मंगलवार को यह दावा किया। बगदादी खूंखार आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) का मुखिया है। ईरान और तुर्की के मुताबिक अमेरिका की अगुवाई वाली फौजों के गुरुवार को किए गए हवाई हमले में बगदादी घायल हो गया था। उसने रविवार को दम तोड़ दिया। बगदादी को तब निशाना बनाया गया जब वह आईएस के अन्य आतंकियों के साथ सीरिया से कारों के काफिले में रक्का पहुंचा था। हालांकि अमेरिकी गठबंधन सेना ने बगदादी की मौत पर अभी तक पुष्टि नहीं की है। अगर बगदादी की मौत की खबर सच निकलती है तो यह आईएस के लिए बड़ा धक्का होगा। सीरिया और इराक की ओर से हमलों की वजह से पहले ही कई इलाके आईएस की पकड़ से निकल चुके हैं। उसकी रसद और हथियारों की आपूर्ति भी ठप हो चुकी है। उसके कब्जे वाले इलाकों से तेल की गैर कानूनी बिक्री भी काफी हद तक बंद हो चुकी है। बगदादी ने 2010 में इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक की कमान संभाली थी। वह डेढ़ लाख से ज्यादा मौतों के लिए जिम्मेदार है। उसने 29 जून 2014 को विश्व में खिलाफत साम्राज्य स्थापित करने का ऐलान किया था। अबु बक्र अल बगदादी ने एक दशक में ही इतना खूंखार आतंकी संगठन खड़ा कर दिया। वर्ष 2003 में इराक युद्ध में सद्दाम हुसैन का साम्राज्य ढहने के बाद उसने जेहाद की राह पकड़ी और एक दशक में ही पूरी दुनिया के लिए खतरा बन गया। वर्ष 2013 में उसकी एक आत्मकथा के मुताबिक बगदाद यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने वाला अबु बक्र अल बगदादी शुरू से जेहादी नहीं था। वह पहले मौलवी था और युवाओं में बेहद लोकप्रिय था। लेकिन सद्दाम युग खत्म होने के बाद कुछ सालों में ही उसने जातीय संघर्ष का फायदा उठाते हुए सीरिया और इराक के बड़े हिस्से पर इस्लामिक स्टेट का खौफ कायम कर दिया। ज्यादा मेलजोल न रखने वाला बगदादी अदृश्य शेख के नाम से मशहूर था। शिया बहुल इराक में सुन्नी शासक सद्दाम के खात्मे के बाद उसने जमात जाएश अहल अल सुन्ना का जमात संगठन की स्थापना में मदद की, जिसमें वह शरिया कमेटी का प्रमुख था। वर्ष 2006 में बगदादी अपने साथियों के साथ मुजाहिद्दीन शूरा काउंसिल में शामिल हो गया। बाद में उसने शूरा काउंसिल संगठन का नाम 2010 में इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक रख दिया। 2011 में अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद वह बड़ा खतरा बन गया। सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद विरोधी अन्य जेहादी संगठनों पर आईएस भारी पड़ने लगा। कहा जाता है कि सउदी अरब, कतर समेत असद विरोधी कई सरकारों ने शुरुआती दौर में आईएस को हथियार और अन्य मदद मुहैया कराई, लेकिन पांच सालों में ही वह पूरी दुनिया के लिए खतरा बन गया। बगदादी ने अपने कब्जे वाले क्षेत्र में इस्लामिक कानून लागू कर दिए। विदेशी बंधकों का सिर कलम कर उनके वीडियो जारी कर उसने दहशत कायम की। यजीदी और अन्य अल्पसंख्यक समूहों की महिलाओं को यौन गुलाम बनाने के कारनामे से उसके संगठन का अत्यंत कूर चेहरा दुनिया के सामने आया। अल बगदादी यदि वाकई मारा गया है तो यह अमेरिका ही नहीं पूरी दुनिया की अमन पसंद जनता की रणनीतिक जीत है। लेकिन कटु सत्य यह भी है कि इतनी जीत से अमन की गारंटी नहीं दी जा सकती। असल सवाल अल बगदादी के मारे जाने का नहीं है, क्योंकि अगर इस्लामी साम्राज्य का फर्जी दावा लोगों को आकर्षित करता रहेगा और उनके भीतर पश्चिमी देश समेत अपने से असहमत इस्लामी और गैर इस्लामी देशों के प्रति नफरत भरी रहेगी तो एक नहीं हजारों बगदादी पैदा होते रहेंगे और उसके भीतर से कोई नया अबु बक्र बन जाएगा, इसलिए खतरा बगदादी इतना नहीं बल्कि वह विचारधारा है, जो अमेरिका समेत अन्य पश्चिमी देशों के बरअक्स एक प्रकार का सपना बुनती है और लोगों को उस जाल में फंसने तथा जान देने और लेने को आमंत्रित करती है। आमतौर पर कहा जाता है कि आतंकवाद की ओर वह झुकते हैं जो कम पढ़े-लिखे होते हैं और धर्म के बारे में विधिवत ज्ञान नहीं रखते। लेकिन अगर बगदादी नाम का कोई व्यक्ति था और जो मारा गया है वह वही है, जिसे बगदाद विश्वविद्यालय से इस्लामी अध्ययन में पीएचडी बताया जाता है यानि इस्लाम में गहरी जानकारी रखने वाला। उसके लिए अन्य धर्मों की भी जानकारी और उनके प्रति उसी तरह का आदर होना चाहिए जैसे दारा शिकोह में था। वह उदारता तभी स्थायी होगी जब उसे ऐसी लोकतांत्रिक राजनीतिक प्रणाली का समर्थन हासिल हो जो पूरी दुनिया में लोकतंत्र कायम करने, आपसी भाईचारे के लिए संकल्पबद्ध हो और एक वैश्विक लोकतांत्रिक ढांचे का भी हिमायती हो। वैसे अगर बगदादी के मारे जाने की खबर सही है तो आईएस इसका जवाब जरूर देगा। कहीं यूरोप में फुटबाल कप अगला निशाना न हो जाए?

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