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Saturday, 5 July 2014

जब जावड़ेकर ने लेट आए कर्मचारियों को छुट्टी पर भेजा

सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने सोमवार को अचानक अपने मंत्रालय में छापा मारा। जब मंत्री कार्यालय पहुंचे तो पाया कि बहुत से अफसर नदारद हैं। देरी से दफ्तर पहुंचने वाले बाबुओं के पसीने छूट गए। उन्हें पहले पता चला कि हाजिरी रजिस्टर मंत्री जी साथ ही ले गए हैं। कुछ देर बाद चपरासियों ने उन्हें लीव एप्लीकेशन थमा दी। देखते ही देखते सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के कमरे के बाहर लीव एप्लीकेशन लेकर खड़े बाबुओं की कतार लग गई। करीब 200 कर्मचारियों को जबरन एक दिन की छुट्टी पर भेज दिया गया। दरअसल जावड़ेकर लगातार विभागीय कर्मचारियों को समय पर आने के निर्देश दे रहे थे। लेकिन स्थिति नहीं सुधर रही थी। सोमवार को वह खुद सुबह नौ बजे दफ्तर पहुंच गए। साढ़े नौ बजे उन्होंने मंत्रालय के हर कमरे का निरीक्षण किया। उपस्थिति नाममात्र की थी। वह अपने कमरे में पहुंचे और हाजिरी रजिस्टर मंगा लिया। कर्मचारी देर से दफ्तर पहुंचे तो उन्हें चपरासियों ने एप्लीकेशन थमा दी। यह भी कहा कि इसे भरकर मंत्री जी से छुट्टी लेनी होगी। देर से आने वाले बाबुओं को मंत्री ने पहले फटकार और फिर एक दिन की छुट्टी पर भेज दिया। जावड़ेकर ने कहा कि कार्रवाई का मकसद है कि काम समय पर हो। बाबूगीरी कम हो काम ज्यादा। मिनिमम गवर्नमेंट और मैक्सिमम गवर्नेंस विभाग में लागू हो। श्री जावड़ेकर ने 200 लेट-लतीफ बाबुओं को एक दिन के आकस्मिक अवकाश पर भेजकर सही संदेश दिया है। सोमवार को समय से मंत्रालय पहुंचे मंत्री जब कक्ष में जाने के बजाय कार्यालय कक्षों की ओर मुड़े तो उन्हें 200 कुर्सियां खाली मिलीं। मंत्री ने खाली कुर्सियों के अपने मोबाइल से चित्र खींचे और फिर आने वाले लेट-लतीफ बाबुओं को अपने पास भेजने को कहा। सबको व्यक्तिगत चेतावनी के साथ ही एक दिन की छुट्टी पर भेज दिया। शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने कार्यभार सम्भालने के बाद अपने मंत्रालय का आकस्मिक निरीक्षण किया था तो उन्हें भी ऐसे ही हालात मिले थे। उन्होंने महज चेतावनी देकर सबको सुधर और बदल जाने की हिदायत दी थी। यह सरकार बदलाव का जनादेश लेकर आई है और प्रधानमंत्री से लेकर मंत्री तक बदले हुए आचरण, श्रम साध्य, दिनचर्या और जन अपेक्षाओं की त्वरित और न्यायपूर्ण पूर्ति के लिए सौ प्रतिशत समर्पण की मिसाल रखने की कोशिश करते दिख रहे हैं। क्या यह बदलाव अकेले प्रधानमंत्री और मंत्रियों के बदले जाने से परिलक्षित होने लगेगा जबकि उनके मंत्रालय में चिराग तले अंधेरा ही  बना रहे। शायद नहीं, इसीलिए प्रधानमंत्री ने कार्यभार ग्रहण करने के तत्काल बाद प्रमुख विभागों के सचिवों के साथ सीधा संवाद किया था। कहा जाता है कि नौकरशाही संकेतों को जल्द ग्रहण करती है पर दो विभागों के आकस्मिक निरीक्षण से तो लगता है कि बदलाव का संदेश ठीक से नीचे तक गया नहीं है। सचिवों की जिम्मेदारी है कि वह अपने नीचे का तंत्र कसें और सरकार की मंशा के मुताबिक सौ फीसदी डिलीवरी सुनिश्चित करें। हम प्रकाश जावड़ेकर और वेंकैया नायडू के इस कदम का स्वागत करते हैं।

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