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Tuesday, 1 September 2015

26/11 के बदले पर आधारित फिल्म फैंटम पाक में बैन?

रविवार शाम को मैंने बहुचर्चित कबीर खान की फिल्म फैंटम देखी। डायरेक्टर कबीर खान आतंकवाद के मुद्दे को लेकर फिल्में बनाते रहते हैं। अकसर उनकी हर फिल्म में दो देशों (भारत और पाकिस्तान) की कहानी बयान की जाती है। अभी ईद के मौके पर आई उनकी फिल्म बजरंगी भाईजान को दोनों मुल्कों के दर्शकों ने काफी पसंद भी किया। लेकिन सैफ अली खान और कैटरीना कैफ को लेकर उनकी इस फिल्म फैंटम पर पाकिस्तान ने बैन लगा दिया है। पाकिस्तान की एक अदालत ने मुंबई के 26/11 हमलों के मास्टर माइंड हाफिज सईद जो लश्कर--तैयबा के मुखिया भी हैं, की याचिका की सुनवाई करते हुए बॉलीवुड फिल्म फैंटम की रिलीज पर रोक लगा दी है। लश्कर व जमात-उद-दावा के सरगना हाफिज सईद ने याचिका में कहा था कि फिल्म में उसके और संगठन के खिलाफ दुप्रचार दिखाया गया है। सईद की याचिका पर सुनवाई करते हुए लाहौर हाई कोर्ट के जज जस्टिस शाहिद बिलाल हसन ने इस फिल्म को पाक के सिनेमाघरों में दिखाने पर रोक लगा दी। पाक में यह फिल्म 28 अगस्त को रिलीज होनी थी। दुखद पहलू यह है कि पाकिस्तान के सैंसर बोर्ड तक ने फिल्म को देखे बगैर ही इस पर प्रतिबंध लगा दिया। हम समझते हैं कि पाकिस्तान इस फिल्म की कहानी से बौखला गया है। यह फिल्म लेखक हुसैन जैदी के उपन्यास मुंबई एवेजर्स पर आधारित है। फैंटम मुंबई के 26/11 आतंकी हमले के बाद के हालात पर बनी है। इस हमले के जो चार मास्टर माइंड थे हाफिज सईद, जकीउर्रहमान लखवी, डेविड हैडली और साजिद मीर को भारत का एक सैनिक अधिकारी किस तरह उनके घरों में जाकर मारता है दर्शाया गया है। फिल्म में दिखाया गया है कि किस तरह भारत ने 26/11 के मास्टर माइंड्स को मार कर बदला लिया है। फिल्म की कहानी कुछ ऐसी है। सेना के पूर्व अधिकारी डैनियल खान (सैफ) की जिस पर कायरता दिखाने और अपनी टीम को खतरे में डालने का आरोप है। इसे लेकर उसके पिता भी उससे नाराज हैं। सरकार की मंजूरी के बिना ही इंडियन सीकेट सर्विस के हैड रॉय (सव्यसांची मुखर्जी) ऐसे खतरनाक मिशन को ग्रीन सिग्नल दे देते हैं। इसे सीकेट मिशन के लिए डैनियल खान को चुनते हैं। रॉ एजेंट समित मिश्रा एक प्लान तैयार करता है जिसमें एक कोर्बटा एक्शन के जरिए आतंकियों को सबक सिखाने की ठान लेता है। ऐसे में याद आती है कि डैनियल खान की और उसे ढूंढकर इस मिशन के लिए मनाया जाता है। बाकी कहानी मैं नहीं  बताऊंगा क्योंकि अगर बता दी तो आपका सस्पेंस ही खत्म हो जाएगा। फिल्म का एक्शन गजब का है। फिल्म देखते समय ऐसा लगता है कि आप कोई विदेशी फिल्म देख रहे हो। सैफ अली खान ने बहुत जोरदार भूमिका निभाई है। कैटरीना कैफ ने अपनी तरफ से अच्छी कोशिश की है। फिल्म की शूटिंग विदेश के कई शहरों में हुई है। लड़ाई के कुछ सीन बेरुत में शूट हुए हैं। वह असल लड़ाई के सीन हैं। एक्शन सीन्स के लिए यकीनन सैफ ने जबरदस्त मेहनत की है। कुछ सीन कबीर खान की पहली फिल्म एक था टाइगर की याद भी दिलाते हैं। सीकेट सर्विस के हैड रॉय के किरदार में सव्यसांची मुखर्जी ने बेहतरीन एक्टिंग की है। शाहनवाज प्रधान जो फिल्म में हाफिज सईद की भूमिका निभा रहे हैं इतने बढ़िया लगे कि उनकी भूमिका पाकिस्तान में फिल्म पर बैन लगने का एक कारण था। पाकिस्तान इस बात से भी घबरा गया कि इस फिल्म से यह भी एक तरह से साबित हो जाएगा कि 26/11 हमलों का जिम्मेदार पाकिस्तान था, उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई थी और इस प्लान को अमली जामा पहनाया लश्कर--तैयबा के 10 लड़ाकों ने। याद रहे कि अजमल कसाब इनमें से ही एक था जिसे जिंदा पकड़ लिया गया था और बाद में फांसी पर चढ़ा दिया गया था। इस फिल्म ने यह भी दर्शाया है कि किस तरह भारत आतंकवाद के गढ़ पाकिस्तान में घुसकर इन आतंकी सरगनाओं को ठिकाने लगा सकता है। जवाबी कार्रवाई का एक रास्ता यह भी है। आप सब इस फिल्म को जरूर देखें।

-अनिल नरेन्द्र

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