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Tuesday, 22 September 2015

पाकिस्तान दुनिया का सबसे खतरनाक देश है

द इंटरनेशनल फैडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट का कहना है कि साल 2014 में न्यूज मीडिया के लिए पाकिस्तान दुनिया का सबसे खतरनाक देश रहा। एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक साल 2008 से 2014 के बीच पाकिस्तान में 34 पत्रकार मारे गए। प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के इस आश्वासन के बावजूद कि पत्रकारों को भरपूर सुरक्षा दी जाएगी, उन पर हमले जारी हैं। गत दिनों पाकिस्तान के मीडिया कर्मियों पर बढ़ते हमलों के  बीच बंदूकधारियों ने पाकिस्तान के एक प्रमुख पत्रकार की उनके घर के बाहर हत्या कर दी। जियो न्यूज और सभा टीवी समेत विभिन्न समाचार चैनलों से जुड़े रहे 42 साल के आफताब आलम बुधवार, नौ सितम्बर को अपने बच्चों को घर छोड़कर शहर के नॉर्थ सैक्टर सी (कराची) इलाके में अपनी कार से जा रहे थे तभी मोटर साइकिल सवार दो बंदूकधारियों ने उन्हें निशाना बनाया। आलम के सिर, गर्दन और सीने में कई गोलियां लगीं। उन्हें तुरन्त अब्बासी शहीद अस्पताल ले जाया गया जहां डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सुनीर शेख ने कहा कि यह लक्ष्य बनाकर हत्या करने का मामला प्रतीत होता है। इसी सप्ताह एक दिन के भीतर पत्रकारों व मीडिया कर्मियों पर तीन अलग-अलग हमले हुए जिनमें दो मारे गए और दो बुरी तरह जख्मी हुए। कराची में जियो न्यूज की वैन पर हुए हमले में एक सैटेलाइट इंजीनियर मारा गया जबकि वैन चालक बुरी तरह घायल हो गया। इस वाकया के चन्द घंटों के भीतर उसी शहर में जियो न्यूज के ही पत्रकार आफताब आलम की हत्या कर दी गई। उधर पेशावर में पीटीवी से जुड़े पत्रकार को एक अज्ञात बंदूकधारी ने उड़ा दिया। साल 2008 में जब से पाकिस्तान में लोकतंत्र की पुनर्बहाली हुई है, पाकिस्तानी मीडिया ने फौज और राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के मानवाधिकार उल्लंघन के कारनामों का साहसिक खुलासा किया है। इसका खामियाजा भी उसे भुगतना पड़ा है। जियो न्यूज ने जब यह खुलासा किया कि उसके स्टार एंकर हामिद मीर पर 2014 में हुए कातिलाना हमले के पीछे आईएसआई का हाथ था, तो अधिकारियों ने जियो न्यूज को बंद करने तक की धमकी दे दी। पाकिस्तानी तालिबान जैसे आतंकी समूहों के निशाने पर भी पत्रकार हैं। अनेक पाकिस्तानी पत्रकार यह कबूल करते हैं कि नौकरी से निकाले जाने और मारे जाने के भय से वह काफी काट-छांट कर खबर लिखते हैं। प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने वादा किया है कि कराची को अपराधियों और आतंकी समूहों से आजाद कराने का काम चल रहा है और अगले दो साल के भीतर यह शहर सुरक्षित हो जाएगा। शरीफ इससे बेहतर कर सकते हैं। दो साल का वक्त एक लंबा इंतजार है और केवल आतंकी ही प्रेस की आजादी के लिए खतरा नहीं हैं। जब तक पत्रकारों को धमकाने वाले फौजी अफसर, आईएसआई व अन्य एजेंसियों की जिम्मेदारी तय नहीं होती तब तक नवाज शरीफ के वादे का कोई मतलब नहीं है।

-अनिल नरेन्द्र

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