Wednesday, 20 July 2016

शहीद पैदा हो, लेकिन मेरे घर में नहीं, पड़ोसी के घर में

शहीद पैदा हों, लेकिन मेरे घर में नहीं, पड़ोसी के घर में। यह कहावत कश्मीरी अलगाववादियों पर बिल्कुल सटीक बैठती है। कश्मीरी युवाओं के मन में अलगाववादियों के दोहरे चेहरे व रवैये को लेकर सवाल उठने लगे हैं। उनकी हकीकत समझने और समझाने की जरूरत है। आम कश्मीरी नौजवानों को जेहाद के रास्ते पर चलने के लिए उकसाने और इस्लाम के नाम पर उन्हें मौत के मुंह में धकेलने वाले ये हुर्रियत नेताओं के खुद के बच्चे कश्मीर की मार-काट से दूर देश-विदेश में पढ़ाई या पैसा कमाकर आराम की जिन्दगी बिता रहे हैं। कश्मीर में अलगाववाद का सबसे बड़ा चेहरा सैयद अली शाह गिलानी को माना जता है। गिलानी ने कैरियर की शुरुआत जमात--इस्लामी कश्मीर से की थी। बाद में खुद ही पार्टी तहरीक--हुर्रियत का गठन किया। गिलानी का बड़ा बेटा नईम और बड़ी बेटी पाकिस्तान के रावलपिंडी में रहते हैं। दोनों ही पेशे से डाक्टर हैं। जबकि छोटा बेटा दिल्ली के मालवीय नगर में रहता है। जहां पर गिलानी सर्दियों के समय लगभग तीन माह का समय बिताते हैं। गिलानी का पोता एक भारतीय प्राइवेट एयरलाइन में कू मेम्बर है। छोटी बेटी फरहत जेद्दाह में रहती हैं। अलगाववादी नेता और दुख्तरान--मिल्लत की चीफ आसिया अंद्राबी जमीयत-उल-मुजाहिद्दीन के पूर्व कमांडर आशिक हुसैन फक्तू उर्प मोहम्मद कासिम की पत्नी है। फक्तू को मानवाधिकार कार्यकर्ता एमएन वांचू की हत्या के जुर्म में उम्रकैद की सजा मिली है और वह 22 साल से श्रीनगर जेल में है। अंद्राबी और उसके पति को गिलानी गुट का समर्थक माना जाता है। लेकिन दुख्तरान--मिल्लत हुर्रियत का हिस्सा नहीं है। आसिया के दो बेटे हैं। बड़ा बेटा मोहम्मद बिन कासिम मलेशिया में आसिया की बड़ी बहन के साथ रहकर बैचलर ऑफ इन्फार्मेशन टेक्नोलॉजी का कोर्स कर रहा है। छोटा बेटा श्रीनगर के एक प्रतिष्ठित स्कूल में अपनी पढ़ाई कर रहा है। आसिया के अधिकतर रिश्तेदार सऊदी अरब, मलेशिया और इंग्लैंड में रहते हैं। अवामी एक्शन कमेटी के नेता मीरवाइज उमर फारुक को हुर्रियत कांफ्रेंस के उदारवादी धड़े का नेता माना जाता है। मीरवाइज की छवि एक कश्मीरी धार्मिक मुस्लिम नेता की है। मीरवाइज की बहन रुबिया फारुक अमेरिका में डाक्टर है। मीरवाइज ने अमेरिकी मूल की मुस्लिम शीवा मसूदी से शादी की है। जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के प्रमुख यासीन मलिक की आस्था पाक से शुरू से ही जुड़ी है। यासीन के पिता सरकारी बस के ड्राइवर थे। यासीन ने पाक लड़की मुशहाला हुसैन से निकाह किया है। मुशहाला जानी-मानी चित्रकार हैं। मुशहाला लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से ग्रेजुएट है। उनके पिता एमए हुसैन पाक के जाने-माने इकोनामिस्ट हैं। मां रेहाना पाकिस्तान मुस्लिम लीग की महिला विंग की प्रेसिडेंट हैं। इन अलगाववादी नेताओं के अपने आचरण पर जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के संस्थापकों में से एक हाशिम कुरैशी के बेटे जुनैद कुरैशी ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है कि अलगाववादी दूसरों के बच्चों को बंदूक उठाकर मरने के लिए क्यों उकसाते हैं? जुनैद उस हाशिम कुरैशी का बेटा है जो 30 जनवरी 1971 को इंडियन एयरलाइंस का विमान हाइजैक कर लाहौर ले गया था। वहां यात्रियों को छोड़ दिया गया था पर विमान को बमों से उड़ा दिया गया था। हालांकि बाद में हाशिम कुरैशी ने आतंक का रास्ता छोड़ दिया। जुनैद ने कहा कि कश्मीरी नौजवान इन अलगाववादियों से ये सवाल पूछें कि अगर बंदूक उठानी जरूरी है तो फिर वे क्यों अपने बच्चों से बंदूक नहीं चलवाते? दरअसल जैसे ही अलगाववादी नेताओं के बच्चे थोड़े बड़े हो जाते हैं उन्हें कश्मीर से बाहर भेज दिया जाता है। ऐसा कश्मीर के लगभग हर अलगाववादी नेता ने किया है। इनके बच्चे न तो कभी किसी प्रदर्शन में शामिल हुए और न ही इन्होंने कभी सुरक्षा बलों पर पत्थर फेंके हैं। कई बार तो ऐसा देखने में आया है कि इन नेताओं के बच्चे उस दौरान कश्मीर में आए और उन्हें तुरन्त वापस भेज दिया गया। कभी किसी नेता ने कश्मीर के खराब हालात के दौरान अपने बच्चों को नहीं बुलाया। हर बार दंगों में इन नेताओं के बच्चे बाहर ही रहते हैं।

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