Sunday, 17 July 2016

इस्लामिक आतंकवाद का मुकाबला करना है तो दुनिया को एकजुट होना पड़ेगा

फ्रांस एक बार फिर आतंकवादी हमले का शिकार हुआ है। आठ महीने के अंदर (14 नवम्बर 2015) पेरिस में हुए भीषण हमलों के बाद फिर ऐसे हमलों का शिकार होना केवल फ्रांस नहीं, पूरी दुनिया के लिए चिन्ता का विषय होना चाहिए। फ्रांस के लिए 14 जुलाई बास्तील पतन दिवस या राष्ट्रीय दिवस है। नीस शहर में बास्तील डे के जश्न को निशाना बनाए जाने से पता चलता है कि आईएस की विचारधारा से प्रेरित इस्लामिक आतंकवादी हमले दुनिया के तमाम देशों में बढ़ रहे हैं। आशंका थी कि जैसे-जैसे आईएस सीरिया और इराक में कमजोर होगा, वह अपना प्रभाव जताने के लिए दुनियाभर में आतंकवादी हमलों का सहारा लेगा। पिछले डेढ़ वर्ष में फ्रांस में जितने हमले हुए उसके बाद उसे ज्यादा सतर्प और चौकस होना चाहिए था। पेरिस हमले के दौरान भी उसकी सुरक्षा चूक सामने आई थी, जो वहां की जांच रिपोर्ट में भी उल्लेखित है। नीस हमले में भी जिस तरह आतंकवादी 100 किलोमीटर की रफ्तार से ट्रक चलाता हुआ शहर में घुसा उसे रोक कर चैक करने की जरूरत थी पर लगता है ऐसा नहीं हुआ। अपनी गर्लफ्रैंड के साथ बास्तील डे की आतिशबाजी का लुत्फ उठा रहे मार्को बर्सोती के मुताबिक रात 11 बजे अचानक सफेद रंग का एक ट्रक इस शहर की सबसे खूबसूरत सड़क प्रोमेनादे देस एंजलेस में घनी भीड़ में घुसा। लोग इधर-उधर भागने लगे। जान बचाने के लिए हम किनारे की ओर भागे। बहुत से लोग एक-दूसरे पर गिर पड़े। ट्रक दो किलोमीटर तक लोगों को रौंदता चला गया। चारों तरफ खून बिखरने लगा। इस हमले में अब तक 84 लोगों की मौत हो गई और 120 लोगों के घायल होने की खबर है। इनमें कई महिलाएं और बच्चे भी हैं। दर्जनों घायलों की स्थिति चिन्ताजनक बनी हुई है। मौके पर मौजूद पुलिस ने आतंकी ड्राइवर को मार गिराया। ड्राइवर 31 वर्षीय फ्रांसीसी-ट्यूनीशियाई नागरिक मोहम्मद लाहौजी बोहेल को एक बाइक सवार ने रोकने की कोशिश भी की, लेकिन वह सफल नहीं हुआ। हमलावर 25 मिनट तक सड़क पर मौत का आतंक मचाता रहा। वह गोलियां भी चला रहा था। बाद में पुलिस ने ट्रक को घेरकर आतंकी को मौत के घाट उतार दिया। आईएस ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए भी जश्न मनाते तस्वीरों को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है। बुसेल्स, ओरलेंडो, ढाका से लेकर इस्तांबुल हमलों की जश्न की तस्वीरें हमने देखी हैं। क्या अब भी समय नहीं आया कि जब दुनिया आतंकवाद के खिलाफ ईमानदारी से एकजुट हो? बुरे और अच्छे आतंकवादी में फर्प को दूर करे। आईएस के कमजोर होने का लगातार दावा हो रहा है बावजूद इसके उसकी विचारधारा से प्रेरित कुछ मुस्लिम यूथ दुनियाभर में आत्मघाती हमले कर रहे हैं। नीस का आतंकी भी ऐसा ही था। जिस ढंग से लोगों को कुचलने के बाद वह ट्रक से उतरकर गोलियां चला रहा था उससे जाहिर है कि वह मरने को तैयार था। ऐसे न जाने कितने सिरफिरे जुनूनी कहां-कहां, किस वेश में बैठे हैं। यह कहा जा सकता है कि इराक-सीरिया में कमजोर पड़ने के बाद आईएस ने अपनी रणनीति बदली है। अब वह जगह-जगह आतंकी वारदातें करने पर ध्यान दे रहा है। इराक और सीरिया में सुरक्षा बलों को यह फायदा है कि वह दुश्मन को सामने देख सकते हैं और हवा व जमीन पर सीधा हमला कर सकते हैं। लेकिन ब्रुसेल्स, ओरलेंडो, ढाका, नीस व इस्तांबुल में आतंकी हमलों को रोकना इसलिए मुश्किल है क्योंकि वह आम नागरिकों के बीच ही रहते हैं, उन्हीं की तरह दिखते हैं। वर्षों तक यह स्लीपर सेल चुपचाप रहते हैं और समय आने पर अपना काम कर जाते हैं। दुख का विषय यह है कि दुनिया इस इस्लामी आतंकवाद के खिलाफ एकजुट अब भी नहीं है। यूरोप की उदार नीतियों का यह आतंकी पूरा फायदा उठा रहे हैं। संतोष का विषय यह है कि जब से मोदी सरकार सत्ता में आई है एक भी बड़ा आतंकी हमला भारत में नहीं हुआ। जम्मू-कश्मीर को छोड़ दें जहां दूसरा खेल है, शेष भारत अब भी सुरक्षित है। इंटरनेट आज आतंकी संगठनों का बड़ा साधन बन गया है। कई देशों में युवा वर्ग आतंकी प्रचार से प्रभावित होकर आईएस में शामिल हो रहे हैं। अकेला आतंकी भी कैसा कहर ढा सकता है, यह नीस के हमले से पता चलता है। यह नई तरह की चुनौती है, जिसका मुकाबला करने के लिए सारी दुनिया को इस बढ़ते इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होना ही पड़ेगा, नहीं तो नीस जैसे हमले होते रहेंगे।

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