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Saturday, 6 February 2021
द इनइक्वालिटी वायरस
दुनिया में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 10 करोड़ के करीब है, जबकि 21 लाख से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। वहीं मानव जीवन पर 100 साल के सबसे बड़े संकट में भी अमीरों की सम्पत्ति बेतहाशा बढ़ी है। महामारी के नौ महीनों में देश के शीर्ष 100 अमीरों की कमाई करीब 13 लाख करोड़ रुपए बढ़ी। अगर इस राशि को देश के 13.8 करोड़ गरीबों में बांटा जाए तो हर व्यक्ति को करीब 94,000 रुपए मिलेंगे। यह खुलासा ऑक्सफैम की द इनइक्वालिटी वायरस नाम की रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक 18 मार्च से 31 दिसम्बर तक दुनिया में गरीबों की संख्या 50 करोड़ बढ़ी है। जबकि अरबपतियों की सम्पत्ति 284 लाख करोड़ रुपए बढ़ी है। सबसे ज्यादा नुकसान भारत में अकुशल श्रमिकों को हुआ है। देश के 12.2 करोड़ श्रमिकों में से 9.2 करोड़ यानि 75 प्रतिशत को नौकरी गंवानी पड़ी। एक अप्रैल 2020 में तो हर घंटे करीब 1.70 लाख लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा। छोटे कारोबारी तबाह हो गए, कारखाने लाखों की तादाद में बंद हो गए। श्रमिकों को पेट भरने के लाले पड़ गए और लाखों की बेरोजगार युवकों को परिवारों सहित अपने गांव में पलायन करना पड़ा। रास्ते में कइयों ने दम तोड़ दिया। हकीकत यह है कि कोविड महामारी के प्रकोप से दुनिया अभी भी पूरी तरह से उबर नहीं पाई है। इस कोरोना काल में आर्थिक मोर्चे पर वैश्विक स्तर पर कई विसंगतियां भी देखने को मिलीं। एक ओर जहां दैनिक मजदूरी से गुजारा करने वाली गरीब जनता दो वक्त की रोटी जुटाने के लिए जद्दोजेहद करती नजर आई, वहीं दूसरी ओर इसके ठीक विपरीत धन-कुबेरों के खजाने और भरते चले गए। ऑक्सफैम की इस द इनइक्वालिटी वायरस रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के परिणामस्वरूप आर्थिक दृष्टि से समाज में असमानता में वृद्धि हुई इस कोरोना काल में जाने-माने उद्योगपति मुकेश अंबानी ने जहां 90 करोड़ रुपए प्रति घंटे के हिसाब से धन कमाया, वहीं 24 प्रतिशत लोगों की एक महीने की आमदनी तीन हजार रुपए से भी कम रही। इसका तात्पर्य यह कि कोरोना काल में मुकेश अंबानी ने एक घंटे में जितनी राशि कमाई, उसे कमाने में एक अकुशल मजदूर को 11,000 साल लगेंगे। इस दर से मुकेश अंबानी ने एक सैकेंड में जितना कमाया, उतना कमाने के लिए एक आम इंसान को तीन साल लगेंगे। भारत के 11 प्रमुख अरबपतियों की आय में महामारी के दौरान जितनी बढ़ोत्तरी हुई, उससे मनरेगा और स्वास्थ्य मंत्रालय का मौजूदा बजट एक दशक तक प्राप्त हो सकता है।
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