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Sunday, 6 December 2020
चले गए जिंदादिल मसाला किंग महाशय धर्मपाल
महाशय धर्मपाल गुलाटी भारत सहित दुनियाभर में लोगों के भोजन को मसालेदार और चटपटा बनाने के लिए जाने जाते थे, लोग उन्हें मसाला किंग भी कहते थे। मसालों के बादशाह एमडीएच ग्रुप के संस्थापक और मालिक महाशय धर्मपाल गुलाटी का 97 साल की उम्र में निधन हो गया। कोरोना से ठीक होने के बाद उन्हें हार्ट अटैक आया जिससे उनका निधन हो गया। पिछले साल ही उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था। महाशय धर्मपाल गुलाटी 22 दिन पहले कोरोना संक्रमण की वजह से माता चानन देवी अस्पताल में एडमिट हुए थे। कुछ दिन बाद उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई और अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। लेकिन फिर तबीयत खराब होने की वजह से दोबारा एडमिट किया गया। उन्हें हार्ट अटैक आया और चल बसे जिंदादिल दिल्ली वाले। यह गौरव की बात है कि एमडीएच मसाला कंपनी अपने गौरवशाली 101 साल पूरे कर चुकी है। एमडीएच ने स्थापना काल से ही शुद्धता व गुणवत्ता को लेकर एक अलग पहचान बनाई और भारत के साथ-साथ विश्व के अन्य देशों में भी एमडीएच ब्रांड मसाले लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं। आज से 101 साल पहले ही एमडीएच कंपनी सियालकोट (जो आज पाकिस्तान में है) से काम कर रही थी। एमडीएच मसालों की शुद्धता एवं गुणवत्ता ही एमडीएच की पहचान है। महाशय जी का जन्म 27 मार्च 1923 को सियालकोट के एक सम्मानित परिवार में हुआ था। महाशय जी ने अपनी प्राथमिक शिक्षा आर्य समाज स्कूल में प्राप्त की तथा कक्षा पांच की पढ़ाई बीच में ही छोड़ने के बाद अपने पुश्तैनी मसालों के कार्य में जुट गए। 1947 में भारत के विभाजन के कारण अपना सब कुछ पीछे छोड़कर और 1500 रुपए की मामूली राशि के साथ अपने परिवार सहित भारत आ गए। यहां आकर दिल्ली के करोल बाग में स्थापित हुए। महाशय जी ने 650 रुपए का एक तांगा खरीदा और कुछ दिन चलाया जिससे अपने परिवार की जीविका चलाई। किन्तु शीघ्र ही कुछ बड़ा करने की इच्छा मन में जागी और पुन अपने पुश्तैनी व्यापार मसालों का कार्य आरंभ किया। मजबूत इच्छाशक्ति और कड़ी मेहनत के बल पर एमडीएच कंपनी को शिखर तक ले जाने का संकल्प पूरा कर दिखाया और एमडीएच मसालों की शुद्धता के क्षेत्र में एक विशेष पहचान बनाई। महाशय जी अपने जीवन में छह सिद्धांतों का पालन करते रहे, ईमानदार बनना, मेहनत करना, मीठा बोलना, कृपा परमपिता परमात्मा की, आशीर्वाद माता-पिता का और प्यार संसार का। उनके शुभ प्रयास से आज 70 से अधिक संस्थाएं जैसे विद्यालय, गौशालाएं, अस्पताल, अनाथालय, वृद्ध आश्रम, विधवाओं एवं निर्धन कन्याओं के विवाह, आर्य समाज, आदिवासी क्षेत्रों में बोर्डिंग स्कूल इत्यादि-इत्यादि बनाना। यह सब धार्मिक व सामाजिक कार्य महाशय धर्मपाल चैरिटेबल ट्रस्ट और महाशय चुन्नी लाल चैरिटेबल ट्रस्ट के अंतर्गत चलते हैं। ऐसे महान कर्मयोगी को हम अपनी श्रद्धांजलि पेश करते हैं। एक जिंदादिल दिल्ली वाला हमें छोड़कर चला गया।
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