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Sunday, 4 April 2021
एंटीलिया कांड ने भाजपा को वह मौका दिया जिसकी तलाश थी
एंटीलिया कांड और मनसुख हिरेन की मौत के बाद बनी परिस्थितियों में भाजपा महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार पर दबाव बनाने को कोई मौका चूकना नहीं चाहती। एनआईए की पूछताछ में सचिन वाजे ने अगर मुंह खोला तो भाजपा का यह काम और आसान हो जाएगा। पिछला विधानसभा चुनाव शिवसेना और भाजपा साथ मिलकर लड़े थे। लेकिन नतीजे आने के बाद शिवसेना ने भाजपा को झटका देकर धुरविरोधी कांग्रेस और राकांपा के साथ मिलकर सरकार बना ली। यह कसक भाजपा भूली नहीं है। वह लगातार कहती रही है कि यह खिचड़ी सरकार ज्यादा दिन नहीं चलेगी। लेकिन अब तक ऐसा कोई मौका नहीं आया जिससे सरकार संकट में पड़ती। संयोग ऐसा रहा कि उद्धव सरकार बनने के कुछ दिन बाद कोरोना की शुरुआत हो गई। ऐसे संकटकाल में भाजपा ने भी ज्यादा दबाव नहीं बनाया। हालांकि यह बार-बार यह जरूर कहती रही कि उद्धव सरकार ने कोरोना महामारी को रोकने के लिए संतोषजनक प्रोग्राम नहीं बनाया और इस वजह से महाराष्ट्र में कोरोना की स्थिति काबू में नहीं आ सकी। ताजा स्थिति में भी महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमण केस आ रहे हैं। लेकिन एंटीलिया कांड ने भाजपा को वह मौका दे दिया जिसकी उसे तलाश थी। भाजपा जब-जब शिवसेना से अलग चुनाव लड़ी है, वह उसे हफ्तावसूली पार्टी के तौर पर प्रचारित करती रही है। 2014 के विधानसभा चुनाव और मुंबई महानगरपालिका चुनाव में भी भाजपा ने शिवसेना पर यही आरोप मढ़ा। एंटीलिया कांड में गिरफ्तार एपीआई सचिन वाजे पर 2017 में हफ्तावसूली का भी मामला दर्ज हुआ था। भाजपा नेता वाजे पर लगे इस आरोप को उद्धव ठाकरे सरकार पर चस्पा करने में जुट गए हैं। वाजे का बचाव कर खुद शिवसेना ने भाजपा को यह मौका दे दिया। इस घटनाक्रम से न सिर्फ शिवसेना बल्कि पूरी महाराष्ट्र सरकार की छवि धूमिल हुई है। यह बात सरकार में शामिल राकांपा और कांग्रेस के नेता भी मान रहे हैं। पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह की छुट्टी इसीलिए करनी पड़ी। पिछले चुनाव के बाद शिवसेना के नेता अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे शीर्ष नेताओं पर झूठ बोलने का आरोप लगाकर दिल्ली से अपने रिश्ते पहले ही बिगाड़ चुके हैं। ऐसे में शिवसेना की मुश्किलें और बढ़ें तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। मुंबई पुलिस के एपीआई सचिन वाजे की गिरफ्तारी के बाद राकांपा अध्यक्ष शरद पवार इस मामले से पल्ला झाड़ने का मूड बनाते दिखाई दे रहे हैं। पवार ने सचिन वाजे प्रकरण पर पूछे गए सवाल को यह कहकर टाल दिया था कि यह लोकल इशू है। इसके बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। तब वह सिर्फ पांच राज्यों में हो रहे चुनावों पर ही बोलते दिखाई दिए थे। लेकिन सोमवार को पवार सीएम उद्धव ठाकरे से मिलने उनके सरकारी आवास वर्षा गए और करीब 45 मिनट चर्चा की। उसके बाद शाम चार बजे यशवंत राव चव्हाण सभागार में राकांपा कोटे के सभी मंत्रियों के साथ बैठक की। गृहमंत्री अनिल देशमुख पर तरह-तरह के आरोप लगे हैं। यह राकांपा के हैं और इसकी आंच राकांपा नेताओं तक पहुंच रही है। शिवसेना अपने आपको इस प्रकरण से अलग करने के प्रयास कर रही है। महाराष्ट्र सरकार के घटकों के आपसी मतभेद को भाजपा पूरा फायदा उठाने में लगी है। उन्हें मौका मिल गया है कि शिवसेना से पुराना हिसाब-किताब बराबर करने का।
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