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Wednesday, 7 April 2021
इस घोर लापरवाही का जिम्मेदार कौन?
एक हादसे में घायल ढाई साल के मासूम ने शुक्रवार शाम दम तोड़ दिया। बच्चे की मौत राजधानी के खोखले सिस्टम में लापरवाही की ऐसी तस्वीर पेश करती है, जिसे सुनकर हर किसी मां-बाप का कलेजा कांप जाएगा। एक एंबुलेंस में जिंदगी और मौत के बीच जूझता बच्चा करीब आठ घंटे तक दिल्ली के सरकारी अस्पतालों के चक्कर काटता रहा, किसी अस्पताल के डॉक्टर ने उस बच्चे को इलाज तो दूर देखने की जहमत नहीं उठाई। समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण मासूम की मौत हो गई। परिजन कई बड़े अस्पतालों में दौड़े, लेकिन इलाज के लिए बैड नहीं होने की बात कहकर दाखिल नहीं किया। बच्चे का नाम कृष्णा था। अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। पिता का नाम भूपेश मंडल है। मूल रूप से बिहार के मधुबनी का निवासी भूपेश मंडल परिवार के साथ कुछ साल से मजनूं का टीला इलाके में एक बिल्डिंग में रहते हैं। भूपेश कुक हैं। शुक्रवार दोपहर दो बजे कृष्णा बहनों के साथ खाना खा रहा था। पानी पीने के लिए उठा। फिर खेलते हुए ग्रिल पर आ गया, जहां से वह तीसरी मंजिल से सड़क पर आ गिरा। घटना के तुरन्त बाद उसके पिता उसे लेकर सश्रुत ट्रॉमा सेंटर गए। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ तो डॉक्टरों ने उसे एम्स ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया। परिजनों का कहना है कि करीब डेढ़ घंटे तक एम्स ट्रॉमा सेंटर एक फ्लोर से दूसरे फ्लोर तक चक्कर काटते रहे। कहा गया कि कोई बैड खाली नहीं। उसके बाद करीब छह बजे आरएमएल पहुंचे, लेकिन किसी डॉक्टर ने हाथ तक नहीं लगाया। आरएमएल से निराश होकर साढ़े सात बजे एलएनजेपी पहुंचे वहां भी किसी डॉक्टर ने हाथ नहीं लगाया। करीब नौ बजे एंबुलेंस में ऑक्सीजन खत्म हो गई। रात लगभग नौ बजे बच्चे को डैड डिक्लेयर कर दिया। शनिवार दोपहर बच्चे का शव दिया गया। परिवार का कहना है कि समय पर इलाज मिलता तो उनका लाडला बेटा जिंदा होता।
-अनिल नरेन्द्र
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