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Friday, 16 April 2021
दोषपूर्ण जांच आरोपी को बरी का आधार नहीं
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि दोषपूर्ण जांच आरोपी को बरी करने का आधार नहीं हो सकता। अगर ऐसा होता है तो लोगों का न्यायपालिका पर से विश्वास उठ जाएगा। कोर्ट ने यह कहते हुए आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में सास-ननद को बरी करने के आदेश को निरस्त कर दिया और नए सिरे से जांच करने का आदेश दिया। उसने माना कि इस मामले में जांच अधिकारी की भूमिका संदिग्ध रही और निचली अदालत ने भी तथ्यों का सही तरीके से अध्ययन नहीं किया। न्यायमूर्ति सुब्रह्मण्यम प्रसाद ने पुलिस से मृतका की मां सरोज भोला की एसडीएम के समक्ष दो जुलाई 2015 को दिए बयानों के आधार पर जांच करने के निर्देश दिए। साथ ही किसी अन्य जांच अधिकारी से जांच करवाने को कहा है जो निरीक्षक स्तर से नीचे का न हो। उन्होंने इस तथ्य की भी जांच करने को कहा है कि क्या यह मामला आत्महत्या के उकसाने की अपेक्षा दहेज हत्या का बनता है या नहीं? न्यायमूर्ति ने कहा कि जांच एजेंसी की चूक या लापरवाही आरोपी के पक्ष में जाती है तो अदालत का दायित्व बनता है कि वह सही जांच कराए। अदालत को इस तथ्य के प्रति अपनी आंखें बंद नहीं करना चाहिए कि वही पीड़ित हैं जो अदालत का दरवाजा खटखटाते हैं और न्याय चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यदि दोषपूर्ण व लापरवाहीपूर्ण जांच के कारण अभियुक्त बच जाता है तो अदालत की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। कोर्ट ने कहा कि वर्तमान मामले में त्रुटिपूर्ण जांच होने की संभावना होने के बावजूद निचली अदालत ने फिर से जांच के आदेश नहीं दिए। मामले में प्रथम दृष्टया साक्ष्य हैं कि मृतका को ससुराल में दहेज प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। सत्र न्यायाधीश ने अपने फैसले में माना कि जांच में गंभीर लापरवाही है। इसके बावजूद उन्होंने दहेज हत्या के अपराध पर विचार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि हर मामले में मजिस्ट्रेट को आरंभिक सुनवाई में यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जांच ठीक तरीके से हो और आरोपी बच न सके। इस मामले में तथ्यों से स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता ने समय-समय पर संयुक्त पुलिस आयुक्त व पुलिस आयुक्त को जांच अधिकारी के खिलाफ शिकायत दी। इस तथ्य पर भी ध्यान नहीं दिया गया कि पुलिस ने एसडीएम को दोबारा कहने के 10 माह बाद मामला दर्ज किया। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि उनकी पुत्री आंचल का 26 अप्रैल 2012 को विवाह हुआ था। ससुराल पक्ष उसे दहेज के लिए प्रताड़ित करता था और विवाह के करीब ढाई वर्ष बाद 24 अक्तूबर 2014 को आंचल का शव पंखे से लटका मिला। पुलिस ने उनके बयान एसडीएम के समक्ष दर्ज होने के बावजूद इसे आत्महत्या का मामला बताते हुए एफआईआर दर्ज नहीं की। दो जुलाई 2015 को उन्होंने पुन एसडीएम के समक्ष शिकायत की तो पुलिस ने 10 माह बाद मामला दर्ज किया। लेकिन जांच में लापरवाही से आरोपी बरी हो गए।
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