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Friday, 9 April 2021
युवाओं की मौत का औजार है मादक पदार्थ
उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि मादक पदार्थों का कारोबार करने वाले लोग ऐसे निर्दोष युवा पीड़ितों की मौत के लिए साधन हैं तथा वह समाज पर घातक प्रभाव डालते हैं। न्यायालय ने कहा कि देश में मादक और नशीले पदार्थों की तस्करी तथा उनके अवैध कारोबार से जनता के एक बड़े हिस्से, विशेष तौर पर किशोरों में मादक पदार्थों की लत लग जाती है। न्यायालय ने कहा कि इस समस्या ने गंभीर और खतरनाक रूप ले लिया है। न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के नवम्बर 2019 के फैसले के खिलाफ दायर अपील को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के उस फैसले को कायम रखा था जिसमें एक किलोग्राम हेरोइन बरामद होने पर एक व्यक्ति को मादक पदार्थ संबंधी कानून के तहत दोषी ठहराते हुए 15 साल की कैद तथा दो लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। न्यायालय ने कहाöआरोपी की ओर से दी गई दलीलों पर विचार करते समय यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि हत्या के किसी मामले में आरोपी एक या दो लोगों की हत्या करता है, जबकि मादक पदार्थों का कारोबार करने वाले लोग कई मासूम युवाओं की मौत का साधन होते हैं... इसका समाज पर घातक प्रभाव पड़ता है। वह समाज के लिए खतरा हैं। यह कटु सत्य है कि देश में मादक पदार्थों की तस्करी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है और आए दिन कोई न कोई तस्कर पकड़ा जाता है। पर अभी तक इसके रोकने की कोई ठोस नीति नहीं बन पाई। देश की युवा पीढ़ी बुरी तरह से प्रभावित हो रही है। इसे रोकना अत्यंत आवश्यक है।
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