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Tuesday, 8 February 2022

इतिहास का सबसे बंटा शीत ओलंपिक

इतिहास का सबसे बंटा हुआ शीतकालीन ओलंपिक का आगाज चीन के बीजिंग शहर में शुक्रवार को शुरू हो गया। स्कीयर आरिफ खान ने शुक्रवार को शीतकालीन ओलंपिक के उद्घाटन समारोह के दौरान छोटे से चार सदस्यों के भारतीय दल की अगुवाई की। खेलों में भी राजनीति को शामिल करना चीन को भारी पड़ा है। चीन की कुटिल चालों से वैसे ही पूरी दुनिया परेशान है, लेकिन इस बार उसने भारत को उकसाने वाली जो हरकत की है उसने भारत को बेहद नाराज कर दिया है। बीजिंग के शीतकालीन ओलंपिक की मशाल रिले में पूर्वी लद्दाख के गलवान में भारतीय सैनिकों के साथ हुई झड़प में बुरी तरह घायल हो चुकी चीनी सेना (पीएलए) के एक सैनिक कमांडर की फाबाओ को शामिल करने की भारत में तीखी प्रतिक्रिया हुई है। परिणामस्वरूप भारत ने शीतकालीन ओलंपिक खेल के उद्घाटन और समापन समारोहों का राजनयिक बहिष्कार कर दिया है। इस ओलंपिक को कई कारणों से दशकों तक याद रख जाएगा। सबसे पहले तो कोरोनाकाल में इसका आयोजन हो रहा है। दूसरा, दुनिया के कई देशों ने मानवाधिकार के हनन को लेकर इसका राजनयिक बहिष्कार किया है। भारत भी इस फेहरिस्त में शामिल है। अमेरिका ने सबसे पहले इसके राजनयिक बहिष्कार की घोषणा की थी। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, कनाडा, जापान, नीदरलैंड और न्यूजीलैंड ने भी इसका बहिष्कर किया। भारत और दुनिया के कई देशों के बहिष्कार के बीच में खेल शुक्रवार से शुरू हो गए। राजनयिक बहिष्कार एक सांकेतिक विरोध है, इसका खेलों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। आधिकारिक तौर पर कोई बड़ी अंतर्राष्ट्रीय सभाओं और प्रमुख शिखर सम्मेलनों में हिस्सा नहीं लेते हैं। हालांकि खिलाड़ी शिरकत करते हैं। राजनयिक बहिष्कार के पीछे अमेरिका के राष्ट्रपति कार्यालय चीन में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघन का हवाला दिया। इसको चीन के शिनजियांग में मुस्लिम उइगर अल्पसंख्यकों पर उत्पीड़न के खिलाफ उठाया गया। प्रतिनिधित्व को भेजना उत्पीड़न को नजरंदाज करने जैसा है। हालांकि पश्चिमी देशों के राजनयिक बहिष्कार से बौखलाए चीन ने उनको भारी कीमत चुकाने की चेतावनी दी है, साथ ही ड्रैगन ने इसको लेकर अमेरिका पर साजिश रचने का आरोप लगाया है। -अनिल नरेन्द्र

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