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Sunday, 20 February 2022
घूंघट, पगड़ी, क्रॉस पर रोक नहीं तो हिजाब पर क्यों?
कर्नाटक हाई कोर्ट में बुधवार को चौथे दिन हिजाब रोक के खिलाफ मुस्लिम छात्राओं की याचिकाओं पर सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस रितुराज अवस्थी, जस्टिस कृष्णा एस. दीक्षित और जस्टिस जेएम खोजी की बैंच में याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने कहाöघूंघट, दुपट्टा, पगड़ी और बिंदी जैसे धार्मिक चिन्ह लोग पहन रहे हैं, केवल हिजाब को क्यों निशाना बनाया जा रहा है? एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील रवि वर्मा कुमार ने कहाöसमाज के सभी वर्गों में अनेक धार्मिक चिन्ह हैं। चूड़ी पहनी जाती है, क्या यह धार्मिक चिन्ह नहीं है? चूड़ी पहनने और बिंदी लगाने वाली लड़की को बाहर नहीं किया जा रहा है। क्रॉस पहनने पर रोक नहीं है। चूड़ी पहनने पर कोई रोक नहीं? केवल गरीब मुस्लिम छात्राएं ही इसके दायरे में क्यों? उनके धर्म के आधार पर क्लास से बाहर किया जा रहा है। यह संविधान के अनुच्छेद 15 का उल्लंघन है। बुधवार को भी हिजाब पहनने के कारण मुस्लिम छात्राओं को क्लास में नहीं जाने दिया गया। यह भेदभावपूर्ण है। कोई नोटिस तक नहीं दिया गया। हमारा पक्ष नहीं सुना जा रहा। सीधे दंडित किया जा रहा है। इससे ज्यादा और क्या हो सकता है? दरअसल राज्य में शिक्षण संस्थानों में हिजाब पर रोक के आदेश के बाद मामला हाई कोर्ट पहुंचा है। अंतरिम आदेश में अदालत ने शुक्रवार को हिजाब और भगवा गमछे जैसी चीजें पहनकर आने पर रोक लगा दी थी और स्कूलों को खोलने के लिए कहा था। इससे पहले छात्राओं की ओर से वकील देवदत्त कॉमत ने पक्ष रखा था। उन्होंने दलील दी थी कि हिजाब इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा है और राज्य संविधान के तहत मिले अधिकारों में दखल नहीं दे सकता।
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