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Saturday, 5 February 2022
सबसे छोटे राज्य में बड़ा सियासी घमासान
पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में देश की निगाहें सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश पर लगी हैं, मगर सबसे छोटे राज्य गोवा का चुनावी घमासान भी कम दिलचस्प नहीं है। भाजपा से लेकर कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) तक कोई भी दल इस घमासान में अछूता नहीं है। वैसे गोवा में पाला बदलने से लेकर विद्रोही तेवरों का रंग सबसे अधिक सत्ताधारी भाजपा को परेशान कर रहा है। गोवा के चुनाव में सियासी पाला बदलने की शुरुआत चार महीने पहले राज्य में तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक एंट्री से हुई थी जब उसने कांग्रेस के दिग्गज पूर्व मुख्यमंत्री लुइजिनो फेलेरियो को तोड़ लिया था। तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा और राज्य के कुछ स्थानीय पार्टियों के नेताओं को भी तोड़ा। मगर राज्य में चुनाव के ऐलान के बाद बड़े घमासान का सबसे बड़ा नुकसान भाजपा को हुआ है। सरकार के कद्दावर मंत्री माइकल लोबो भाजपा से खटपट के बाद कांग्रेस में जाकर अपनी पत्नी दिलाइल लोबो को टिकट दिलाने में सफल रहे हैं। लोबो के पाला बदलने से उनके प्रभाव वाली आधा दर्जन सीटों पर भाजपा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल पर्रिकर के बेटे उत्पल पर्रिकर का निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरना भी पार्टी के चुनावी नेरेटिव को झटका दे रहा है। केंद्रीय राज्यमंत्री श्रीपद नाइक के बेटे सिद्धेश नाइक ने बतौर निर्दलीय नामांकन तो नहीं किया, मगर नाराजगी जाहिर कर दी है। गोवा के चुनावी दंगल में हाई-प्रोफाइल नेताओं के स्तर पर भाजपा की अंदरूनी उठापटक का आलम यह है कि राज्य के एक उपमुख्यमंत्री बाबू कवडेकर की पत्नी सावित्री कवडेकर टिकट न मिलने के बाद भाजपा के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं। भाजपा के अन्य विधायक कार्लोस अल्मेडा ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है। अभी तक की स्थिति तो यह लगती है कि गोवा में कांग्रेस का पलड़ा भारी है।
-अनिल नरेन्द्र
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