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Wednesday, 23 March 2022
क्या इमरान की विदाई तय है?
11 मार्च को पाकिस्तान के वजीर-ए-आजम इमरान खान के भाषण में सैन्य प्रतिष्ठान व उनके बीच चल रही तनातनी सामने आ गई है। उन्होंने जेयूआर-एफ नेता मौलाना फजलुर्रहमान का हवाला देते हुए कहा थाöमैं सेना प्रमुख जनरल बाजवा से बात कर रहा था। उन्होंने मुझसे कहा कि फजल को डीजल न कहें, मैं अकेला नहीं हूं जो ऐसा कह रहा हूं। लोगों ने उनका नाम डीजल रखा है। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान के विपक्षी दलों के 100 से ज्यादा सांसदों ने प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ आठ मार्च को अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है। जिस पर नेशनल असेंबली में मतदान 28 मार्च को होने की संभावना है। सत्तारूढ़ पीटीआई के असंतुष्ट 25 सांसदों ने इस्लामाबाद के सिंध हाउस में डेरा डाल रखा है। असंतुष्ट सांसदों से नाराज पीटीआई कार्यकर्ता गेट तोड़ते हुए सिंध हाउस में प्रवेश कर गए। पुलिस ने 13 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है। पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज के पंजाब प्रांत अध्यक्ष राणा सनातुल्ला ने बताया कि विपक्षी लांग मार्च करते हुए 27 मार्च को इस्लामाबाद में प्रवेश करेंगे और कांस्टीट्यूशन एवेन्यू के सामने धरना देंगे। लांग मार्च की शुरुआत 24 मार्च को लाहौर से होगी। इमरान खान ने संयुक्त विपक्ष की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के बीच शुक्रवार को सेना प्रमुख जनरल जावेद बाजवा से मुलाकात की। इस मुलाकात के एजेंडे को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। स्थानीय मीडिया का कहना है कि इमरान और बाजवा ने इस्लामिक देशों के संगठन के पाकिस्तान में आगामी शिखर सम्मेलन, बलूचिस्तान में हिंसा और इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर होने वाले मतदान को लेकर बातचीत की है। इमरान आर्मी का सपोर्ट चाहते हैं क्योंकि 27 मार्च को उनके खिलाफ लाए गए विपक्षी दलों के अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग हो सकती है। वहीं पाकिस्तान के अखबार फ्राइडे टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसा भी हो सकता है कि इमरान बाजवा को हटाना चाहते हों। वहीं विपक्षी नेता शहबाज शरीफ ने कहा है कि शक्तिशाली सैन्य प्रतिष्ठान देश में मौजूदा राजनीतिक संकट में किसी का पक्ष नहीं ले रहा है। समा टीवी के शो नदीम मलिक लाइव में शुक्रवार रात शरीफ ने कहा कि विपक्षी दल मुझे अंतरिम प्रधानमंत्री बनाना चाहते हैं, लेकिन अंतिम फैसला पीएमएल-एन प्रमुख नवाज शरीफ ही करेंगे। इमरान खान की सरकार को वर्तमान में नेशनल असेंबली में केवल पांच वोटों की बढ़त है। इसके अलावा उनके अपने 24 सांसदों ने विपक्ष के साथ जाने की धमकी दी है। सरकार के मंत्री अपनी पार्टी के विद्रोही सदस्यों पर जबरदस्ती और रिश्वतखोरी का आरोप लगा रहे हैं। इमरान की पार्टी के रमेश कुमार का दावा है कि तीन संघीय मंत्रियों सहित सदन के 33 सदस्यों ने सत्तारूढ़ दल छोड़ दिया है। देश में आसमान छूती महंगाई जहां बिगड़े आर्थिक हालात का इशारा करती है, वहीं खान की पार्टी के भीतर फैली अशांति राजनीतिक अस्थिरता का साफ संकेत देती है। देखना है कि आने वाले दिनों में पाकिस्तान की सियासत कैसी करवट लेती है।
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