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Sunday, 18 November 2012

ऐतिहासिक गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब में तलवारें व खूनखराबा



   Published on 18 November, 2012   
अनिल नरेन्द्र
यह दुख की बात है कि नई दिल्ली के ऐतिहासिक गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब में बृहस्पतिवार को तलवारें निकल आईं और खूनखराबा हुआ। गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब का निर्माण सन 1783 में हुआ था। इसे तैयार करने में कुल 12 वर्ष लगे। मुगल शासक शाह आलम द्वितीय ने रायसीना हिल्स के इस हिस्से में गुरुद्वारे की इजाजत दी थी। सिखों के नौवें गुरू तेग बहादुर के शिष्य लखी शाह बंजारा की याद में इस स्थान पर बाद में गुरुद्वारा बनाने की बात हुई। वर्तमान में इस गुरुद्वारे में दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजिंग कमेटी का मुख्यालय भी स्थित है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का चुनाव कराने व अन्य कई मुद्दों को लेकर लम्बे समय से चल रहे सरना व बादल गुट के विवाद ने बृहस्पतिवार को हिंसक रूप ले लिया। कमेटी की कार्यकारिणी की बैठक में सरना गुट ने बादल गुट के पदाधिकारियों को शामिल होने से रोका तो दोनों ओर से तलवारें निकल आईं। इस समय गुरुद्वारा कमेटी पर परमजीत सिंह सरना के नेतृत्व वाली दिल्ली अकाली दल का बहुमत है। डीएसजीपीसी में टकराव की वजह अब सरना और कमेटी के जनरल सैकेटरी गुरमीत सिंह शंटी के बीच आए मतभेद हैं। डीएसजीपीसी के संविधान के अनुसार अध्यक्ष ही हर दो साल बाद जनरल सैकेटरी की नियुक्ति कर सकता है। गुरुद्वारा कमेटी के चुनाव हर चार साल बाद कराए जाते हैं लेकिन अब छह साल हो चुके हैं। पहले दो साल बलबीर सिंह विवेक विहार जनरल सैकेटरी थे लेकिन उसके बाद शंटी को जनरल सैकेटरी बना दिया गया। अब शंटी को हटाने की तैयारी चल रही है लेकिन पेंच यह है कि डीएसजीपीसी की बैठक बुलाने का अधिकार भी जनरल सैकेटरी को ही है। वह बैठक बुलाने के लिए तैयार नहीं होंगे, इसलिए सरना ने अपने एक ज्वाइंट सैकेटरी के अधिकार बढ़ाकर जनरल सैकेटरी के बराबर कर दिए हैं। वह बैठक बुलाकर शंटी को उनके पद से हटाने की कोशिश करेंगे जिसका विरोध शंटी का गुट करेगा। इसी मुद्दे पर इस साल मार्च में बालाजी गुरुद्वारे में भी हिंसा हो चुकी है। गुरुद्वारा कमेटी का नया चुनाव 31 दिसम्बर से पहले कराने के कोर्ट के आदेश को लेकर भी उहापोह की स्थिति बनी हुई है क्योंकि दिल्ली सरकार ने अध्यक्ष का चुनाव सीधे कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अभी केंद्र को इस पर अपनी मुहर लगानी है। उससे पहले चुनाव कराना सम्भव नहीं है। बृहस्पतिवार को करीब आधे घंटे तक तलवारें और लाठी-डंडे चले। एक-दूसरे पर ईंट-पत्थर व गमले फेंके गए। गुरुद्वारे के ऑफिस के शीशे तोड़ दिए गए। इस घटना में सरना गुट के पांच व शिरोमणि अकाली दल बादल के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके सहित बादल गुट के छह सदस्य घायल हो गए। सरना व बादल गुट ने एक-दूसरे पर हवा में पांच-पांच राउंड गोलियां चलाने के आरोप भी लगाए हैं। इसी बीच वहां पुलिस बल पहुंचा और स्थिति को काबू कर लिया। यह दुर्भाग्य की बात है कि गुरू के पवित्र स्थान पर इस प्रकार तलवारें और गोलियां चलें। राजनीतिक मतभेदों को हिंसा के बल पर मिटाने की कोशिश को कोई तर्पसंगत नहीं मान सकता। बेहतर होगा कि दोनों गुट मिल-बैठकर कोई बीच का रास्ता निकाल लें और भविष्य में गुरू साहिब के इस पवित्र घर को आघात न पहुंचाएं।

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