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Tuesday, 27 November 2012

आज मुकदमा हटेगा कल पद्म भूषण दे देना


 Published on 27 November, 2012
 अनिल नरेन्द्र
उत्तर प्रदेश की आतंकवादी घटनाओं से मुल्जिमों को निर्दोष बताकर मुकदमे वापस लेने की उत्तर प्रदेश सरकार की कोशिशों का विरोध तेज हो गया है। राजनीतिक पार्टियों से लेकर अदालतों में इसका विरोध हो रहा है। विधान परिषद में कांग्रेस के नेता नसीब पठान ने कहा कि आतंकवाद के आरोपियों से मुकदमे वापस लेने का यह तरीका ठीक नहीं है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मी कान्त वाजपेयी ने कहा कि हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी के बाद सपा सरकार ने सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार खो दिया है। उन्होंने कहा कि आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ जहां एक तरफ पूरी दुनिया जूझ रही है वहीं सपा सरकार आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त होने के आरोपी युवकों को वोट के लालच में छोड़े जाने की कवायद कर रही है। भाजपा प्रवक्ता राजेन्द्र तिवारी ने कहा कि सपा सरकार ने एक वर्ग विशेष को प्रसन्न कर वोट हासिल करने के लालच में तुष्टीकरण की सारी हदें पार कर दी हैं। यही कारण है कि न तो यह सरकार कानून व्यवस्था पर कोई नियंत्रण कर पा रही है और न ही प्रदेश की बुनियादी समस्याओं का हल करने की दिशा में कोई ठोस कदम उठा पा रही है। सबसे तल्ख टिप्पणी इलाहाबाद हाई कोर्ट ने की है। सीआरपीएफ कैम्प पर आतंकी हमला जैसी वारदातों में शामिल लोगों पर से केस उठाने की कवायद को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान जस्टिस आरके अग्रवाल और आरएसआर मौर्य की खंडपीठ ने कहा, यह कौन तय करेगा कि आतंकी कौन है। जब मामला कोर्ट में है तो अदालत को ही तय करने दीजिए। सरकार खुद कैसे तय कर सकती है कि कौन आतंकवादी है। आतंकवादियों पर से मुकदमा हटाने की पहल कर क्या सरकार आतंकवाद को बढ़ावा दे रही है। आज आप आतंकवादियों को छोड़ दें, कल उन्हें पद्म भूषण देंगे? संकट मोचन मंदिर, कैन्ट स्टेशन सहित वाराणसी के कई स्थानों पर बम ब्लास्ट, रामपुर सीआरपीएफ कैम्प पर आतंकी हमला जैसी वारदातों में शामिल लोगों पर से केस उठाने की कवायद को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अदालत ने यह टिप्पणी की। इस मामले को लेकर वाराणसी के नित्यानन्द चौबे और सामाजिक कार्यकर्ता राकेश न्यायिक ने जनहित याचिका दाखिल की है। याचीगणों ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करते हुए वाराणसी में हुए बम ब्लास्ट के आरोपियों पर चलाए जा रहे आपराधिक मुकदमे को हटाने के लिए प्रदेश के विशेष सचिव द्वारा 31 अक्तूबर 2012 को जारी आदेश को चुनौती दी है। रामपुर के सीआरपीएफ कैम्प पर दिसम्बर 2007 में हुए आतंकी बम ब्लास्ट के आरोपियों के विरुद्ध भी आपराधिक मुकदमे वापस लेने के राज्य सरकार के आदेश को चुनौती दी गई है। याचीगणों के अधिवक्ता एसके गुप्ता और शिवशंकर त्रिपाठी आदि का तर्प था कि आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की 302, 307, 323, 427 और 120बी आदि धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं। इनका कृत्य देशद्रोह की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में मुकदमे वापस लेने से इस तरह का कृत्य करने वालों को बढ़ावा मिलेगा। याचिका में इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश को रद्द करने की प्रार्थना की गई है। हमारी राय में उत्तर प्रदेश सरकार को अदालतों पर भरोसा रखना चाहिए। अगर पुलिस ने इन केसों में निर्दोषों को फंसाया है तो वह अदालत में छूट जाएंगे। हमने नई दिल्ली में लाजपत नगर बम धमाके में देखा कि दिल्ली हाई कोर्ट ने सबूतों के अभाव में दो आरोपियों मिर्जा निसार हुसैन और मोहम्मद अली भट्ट को बरी कर दिया। समाजवादी पार्टी सरकार के हित में यह नहीं होगा कि उस पर आतंकवाद को बढ़ावा देने की मुहर लगे। यह न तो उसके लिए अच्छा है और न ही देश के लिए। राज्य सरकार को मुकदमे वापस लेने के आदेश को रद्द करना चाहिए।


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