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Wednesday, 26 December 2012

सचिन के संन्यास के साथ समाप्त हो गया एक युग


 Published on 26 December, 2012
 अनिल नरेन्द्र
सचिन तेंदुलकर के रिटायरमेंट की चर्चा पिछले कुछ समय से चल रही थी, खासकर टेस्ट मैचों में उनके खराब फार्म को देखते हुए। अब जब उन्होंने वन डे से रिटायर होने का फैसला कर लिया है तो सबको आश्चर्य हो रहा है। हालांकि इसमें आश्चर्य होने की कोई खास वजह नहीं होनी चाहिए थी। भारत की वर्ल्ड कप जीत के बाद से सचिन बहुत कम वन डे खेल रहे थे, जो संकेत था कि वह इस फॉर्मेट से जल्द रिटायर होने का इरादा बना रहे हैं। वर्ल्ड कप जीत से सचिन की जिन्दगी की सबसे बड़ी तमन्ना पूरी हो गई थी और उन्हें यह अहसास भी हो गया था कि अगले वर्ल्ड कप में वह हिस्सा शायद न ले सकें। दरअसल सचिन के चहेते कभी अपने हीरो व भगवान का सिर झुकते नहीं देखना चाहते। पिछले कुछ समय से सचिन रन तो नहीं बना पा रहे थे, उल्टे जिस तरह से वह क्लीन बोल्ड हो रहे थे उससे उनके फैंस और चाहने वालों को भी लगने लगा था कि मास्टर ब्लास्टर को अब संन्यास ले लेना चाहिए। पिछले दिनों आस्ट्रेलिया के महान क्रिकेटर, कप्तान रिकी पोंटिंग की संन्यास की घोषणा का भी सचिन पर जरूर असर हुआ होगा। बहरहाल सचिन का वन डे क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला स्वागत योग्य है। क्रिकेट के इस महान खिलाड़ी के नाम लगभग हर रिकार्ड दर्ज है। वह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में 100 शतक जमाने वाले अकेले खिलाड़ी हैं। उन्होंने अब तक 463 वन डे मैचों में सर्वाधिक 18426 रन बनाए हैं। क्रिकेट प्रशंसकों को लग रहा था कि पिछले साल विश्व कप जीतने का सपना साकार होने के बाद वह दिन दूर नहीं जब सचिन वन डे से संन्यास की घोषणा कर देंगे। अब जब उन्होंने फैसला कर लिया है तो सभी चाहते हैं कि वह टेस्ट क्रिकेट में कुछ धमाकेदार पारियां खेल कर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से भी पूरे सम्मान के साथ विदा हों। वैसे तो सचिन तेंदुलकर काफी सालों से वन डे मैच अपनी पसंद के हिसाब से खेल रहे थे। उन्होंने आखिरी वन डे मैच इस साल मार्च में एशिया कप के दौरान खेला था, जिसमें उन्होंने अपना सौवां शतक जमाया था। सचिन भारतीय क्रिकेट के सही मायनों में महानायक हैं और किसी महानायक पर जब आरोपों की बौछार हो या कीचड़ उछाला जाए तो अच्छा नहीं लगता। सचिन के बारे में कहा जाता रहा है कि वह अपनी आलोचनाओं का जवाब खुद न देकर अपने बल्ले से देते हैं और उन्होंने अपने 23 साल लम्बे कैरियर में ऐसा एक बार नहीं बल्कि कई बार किया। लेकिन इस बार लगता है कि उम्र का असर उन पर भारी पड़ने लगा था। वैसे सभी चाहते हैं कि वे जब क्रिकेट को अंतिम रूप से अलविदा कहें तो धमाकेदार पारी खेलें। संन्यास ऐसी चीज है, जिससे हर किसी को गुजरना पड़ता है। लेकिन रिटायरमेंट का टाइम सही हो तो आप आरोपों की बौछार से बच सकते हैं जैसे सुनील गावस्कर, रिकी पोंटिंग, एडम गिलक्रिस्ट ने किया। हम सभी चाहते हैं कि क्रिकेट के इस महानायक की विदाई पूरे सम्मान के साथ हो। आईपीएल फ्रेंचाइजी मुंबई इंडियन ने संन्यास ले चुके सचिन की 10 नम्बर की जर्सी को भी रिटायर करने की मुहिम चला दी है। ट्विटर पर सचिन के प्रशंसकों ने यह संदेश लिखा है कि नम्बर 10 सिर्प सचिन का है। जब सचिन हमारे लिए वन डे में इतना कुछ कर सकते हैं तो क्या हम उनका सम्मान 10 नम्बर की जर्सी को रिटायर करके नहीं कर सकते।


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