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Wednesday, 29 April 2020

छोटे व मध्यम उद्योगों के लिए विशेष पैकेज

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शनिवार को पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा है कि लॉकडाउन ने माइक्रो स्माल मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) सेक्टर को तबाही के कगार पर खड़ा कर दिया है।
डॉ. मनमोहन सिंह की अगुवाई वाली कांग्रेस की कोरोना परामर्श समिति ने एमएसएमई क्षेत्र को उबारने का एक रोडमैप तैयार किया है। बीते पांच दिनों में इस क्षेत्र से जुड़े लोगों और विशेषज्ञों के आए करीब 60 हजार सुझावों व फीडबैक के अध्ययन के बाद परामर्श समिति ने पांच अहम सुझाव व सिफारिशें की हैं। पीएम से एमएसएमई को विशेष पैकेज का अनुरोध करते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि लॉकडाउन से इस सेक्टर को रोज 30,000 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। चिन्ता की बात यह है कि इस सेक्टर में 11 करोड़ से ज्यादा नौकरी छिन जाने का खतरा है। कांग्रेस की ओर से दिए गए पांच सुझावों में सबसे पहली तवज्जो एक लाख करोड़ के एमएसएमई सेक्टर वेज प्रोटेक्शन की है ताकि नौकरियों को बचाने और आर्थिक संकट को दूर करने में मदद दी जा सके। दूसरे सुझाव में कारोबार की चुनौतियों का समाधान निकालने के लिए एक लाख करोड़ रुपए के केडिट गारंटी फंड का सुझाव देते हुए कहा गया है कि इससे तत्काल लिक्विडिटी और जरूरी पूंजी मिल पाएगी। तीसरे सुझाव में कहा गया है कि आरबीआई (रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया) ने जो राहत का ऐलान किया है उसका जमीनी क्रियान्वयन बैंक की ओर से हो। एमएसएमई को आसान दरों पर व जल्द कर्ज मिले। आरबीआई के मौद्रिक निर्णयों को सरकार की वित्तीय ईकाइयों को फायदा मिल सके। मंत्रालय में 24 घंटे की एक विशेष एमएसएमई मार्गदर्शन की हेल्पलाइन शुरू की जाए। चौथे सुझाव में आरबीआई की तीन माह की घोषित लोन मोरेटोरियम को और बढ़ाने का सुझाव दिया है। एमएसएमई को टैक्स में छूट, कटौती व अन्य सेक्टर विशेष समाधान का रास्ता निकालने को कहा गया है। पांचवीं सिफारिश में अधिक कोलेटरल की वजह से एमएसएमई ईकाइयों को कर्ज मिलने में होने वाली दिक्कत को दूर करने को कहा गया है। पार्टी ने कहा है कि मार्जिन मनी की सीमा मौजूदा स्थिति में बहुत अधिक है जिससे कर्ज में कठिनाई हो रही है। हम समझते हैं कि यह सारे सुझाव अच्छे हैं। फिर इन्हें विशेषज्ञों और क्षेत्रों के जानकारों से सलाह करने के बाद दिए गए हैं। अब इनमें से सरकार क्या मानती है, कितना मानती है, रिजैक्ट करती है यह देखना होगा। सरकार के वित्तीय विशेषज्ञों को इन पर गंभीरता से गौर करना चाहिए। आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार राहत पैकेज जारी होना चाहिए। इसमें कोई शक नहीं कि इन सेक्टरों में मदद की सख्त जरूरत है।

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