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Wednesday, 6 March 2013

एक निष्ठावान, बहादुर पुलिस अफसर की निर्मम हत्या




 Published on 6 March, 2013 

अनिल नरेन्द्र
पुंडा का गुंडाराज सालों से चर्चा में रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह हों या फिर मायावती सभी ने पुंडा के गुंडाराज पर नकेल कसने की कोशिश की थी। शनिवार को इसी पुंडा विधानसभा का बलीपुर गांव एक बार फिर गुंडागर्दी का गवाह बना। सीओ पुंडा जिया उल हक को जिस बेरहमी से मारा गया वह प्रदेश पुलिस के इकबाल पर गहरी चोट है। शनिवार को पुंडा के गांव बलीपुर में ग्राम प्रधान नन्हें यादव और उनके भाई की हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड की खबर मिलने के बाद ही पुलिस उपाधीक्षक जिया उल हक मौके पर पहुंचे थे लेकिन गुस्साए गांव वालों ने पुलिस पर ही हमला बोल दिया। बताया जाता है कि पुलिस अधिकारी जिया उल हक को पहले लाठी-डंडों से पीटा गया और जब वह गिर गए तो उनको गोली मार दी गई। मौके पर ही उनकी मौत हो गई। सीओ पुंडा जिया उल हक की इस ढंग से निर्मम हत्या का सभी को दुख होना चाहिए। सामान्य परिवार से होते हुए साहस और सूझबूझ रखने वाले जिया उल हक किसी भी घटना पर संबंधित एसओ की प्रतीक्षा किए बगैर खुद ही मौके पर पहुंच जाते थे। उनकी पहचान एक समझदार और जिम्मेदार अफसर के रूप में थी। अभी एक साल पहले 21 जनवरी 2012 को उनकी शादी हुई थी। पत्नी परवीन आजाद लखनऊ के ऐरा मेडिकल कॉलेज में बीडीएस कर रही हैं। इस हत्याकांड के बाद सपा सरकार की काफी किरकिरी हो रही है। खासतौर पर मुस्लिम समुदाय पर जिया उल हक की हत्या के बाद से डोरे डालने की सपा की मुहिम को झटका लगा है। कई अन्य मसलों को लेकर मुस्लिम समुदाय पहले से ही अखिलेश यादव की सरकार से नाखुश चल रहा है अब यह मामला और जुड़ गया है। इस मामले में राजा भैया की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। वे पुंडा के ही हैं। उन पर सालों से गुंडागर्दी कराने का आरोप लगता रहा है। मायावती सरकार ने तमाम विवादित मामलों में उन्हें जेल भी भिजवा दिया था। लेकिन सपा शासन आने के बाद वे फिर मंत्री बन बैठे। पिछले महीने उनके पास से जेल मंत्रालय का प्रभार हटा लिया गया था। अब उनके पास खाद्य और रसद मंत्रालय का प्रभार ही रह गया था जो अब छिन चुका है। राजा भैया के इस्तीफे के बाद प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों में कई बदलाव आ सकते हैं। राजा भैया की बाहुबली शैली यूपी के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को ज्यादा पसंद नहीं आती। शायद इसी के चलते पिछले महीने उनसे एक मंत्रालय ले भी लिया गया था। अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री को सौंपने के बाद राजा भैया ने मीडिया से कहा कि यदि पुंडा प्रकरण में सरकार सीबीआई जांच कराना चाहे, तो वे इसका स्वागत करेंगे। उल्लेखनीय है कि शहीद पुलिस अफसर जिया उल हक की पत्नी ने मांग की है कि इस मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए। यूपी के वरिष्ठ मंत्री आजम खान की टिप्पणी थी कि सीओ जिया उल हक की हत्या की घटना ने सरकार को मुस्लिम समाज में मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा। हम शहीद जिया उल हक जैसे बहादुर, निष्ठावान पुलिस अफसर को सलाम करते हैं और उम्मीद करते हैं कि कसूरवार जल्द नपेंगे।

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