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Saturday, 8 September 2012

मोबाइल टॉवरों से रेडिएशन की बढ़ती समस्या



 Published on 8 September, 2012

अनिल नरेन्द्र
दिल्ली के दुर्गापुरी एक्सटेंशन के एक परिवार की उस शिकायत में भले ही 100 फीसदी सच्चाई न हो कि मोबाइल टॉवर की वजह से घर के सदस्यों को कैंसर हो गया है लेकिन इस मामले ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है। यह सवाल है स्वास्थ्य मानकों की अनदेखी करते हुए इन टॉवरों को लगाने की। मोबाइल हैंड सेट और टेलीकॉम टॉवरों से नजदीकी आपके जीवन को मुश्किलों में डाल सकती है। देश एवं विदेशों में हुए इस अध्ययन से यह नतीजे सामने आए हैं। मुंबई में भी मोबाइल टॉवर के रेडिएशन से एक अपार्टमेंट के कुछ फ्लैटों में कैंसर के मामले दर्ज किए गए हैं। वहीं 10 देशों के पांच हजार लोगों पर हुए एक अध्ययन में बताया गया है कि जो लोग रोज आधे घंटे से ज्यादा 10 वर्षों तक मोबाइल पर बात करते हैं उनमें ब्रेन ट्यूमर होने की सम्भावना 300 गुना बढ़ जाती है। हालांकि टॉवरों के ठीक नीचे रहने वालों को खतरा कम होता है। टॉवरों से होने वाले रेडिएशन का प्रभाव उसके लगभग 300 मीटर दायरे में रहने वालों पर होता है। वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन ने मोबाइल टॉवर लगाने के लिए कुछ मानक तय किए हैं, जिसमें टॉवर की ऊंचाईं, आबादी से इसकी दूरी आदि तय की गई है मगर दिल्ली में अब भी इस मामले को गम्भीरता से नहीं लिया जा रहा है। यही वजह है कि तंग कालोनियों में घरों के ऊपर टॉवर लगे हैं। अवैध रूप से चल रहे टॉवरों के साथ यह समस्या ज्यादा है जिनको लेकर एमसीडी अब भी गम्भीर नजर नहीं आ रही। एमसीडी के 12 जोनों में कुल 5459 मोबाइल टॉवर लगे हुए हैं। इनमें से 2742 के लिए ऑपरेटर कम्पनियों ने इजाजत ली थी, मगर 2777 बिना अनुमति के ही चल रहे थे। वेस्ट जोन में सबसे ज्यादा 735 अवैध टॉवरों की जानकारी मिली है। दूसरे नम्बर पर रोहिणी जोन है। मुंबई के वर्ली इलाके में 20 माले की ऊषा किरण बिल्डिंग के सामने 50 मीटर दूर स्थित सात मंजिला इमारत की छत पर एक मोबाइल टॉवर लगाया गया। तीन वर्षों के बाद ऊषा किरण बिल्डिंग की पांचवीं से 10वीं मंजिल के बीच छह कैंसर के मरीज पाए गए। जिस बिल्डिंग की छत पर टॉवर लगाया गया था उसके ऊपर के तीन मंजिलों के लोगों ने भी आए दिन बीमार रहने, चिड़चिड़ापन, बेचैनी, अनिद्रा आदि की शिकायतें दर्ज कराईं।  एक से अधिक सिम वाले मोबाइल खतरनाक होते हैं। इसकी वजह यह है कि हर मोबाइल प्रति मिनट सिग्नल मोबाइल टॉवर को भेजता है। सिग्नल से होने वाली रेडिएशन का प्रभाव आपके शरीर पर पड़ता है। कई सिम वाले मोबाइल में हर सिम अलग-अलग समय पर सिग्नल भेजता है। ऐसे में एक मिनट में कई सिग्नल टॉवर को भेजे जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल जिस अंग के पास ज्यादा रखा जाता है उस पर अधिक प्रभाव होता है। पुरुषों को अपनी कमीजों की ऊपरी जेब में मोबाइल नहीं रखना चाहिए। वह पेन्ट की जेब में रखें। कुछ सुझाव है ः मोबाइल को सोते समय लगभग एक मीटर की दूरी पर रखें। मोबाइल से बात करते समय ईयर फोन का प्रयोग करें तो बेहतर है। पांच मिनट से अधिक एक बार में बात न करें। घर के आसपास कहीं टॉवर हो तो खिड़की या खुली जगह पर सोने से बचें। यदि सिर दर्द, बेचैनी या चिड़चिड़ापन महसूस हो तो डाक्टर से सम्पर्प करें और रेडिएशन के स्तर की जांच भी करवाएं। मोबाइल आज के युग में एक मजबूरी बन गया है पर सुविधा के साथ-साथ समस्या भी लेकर आया है।

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