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Friday, 25 June 2021
योग विश्व को दी गई भारत की अमूल्य धरोहर
संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा घोषित अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर योग के विज्ञान पर चर्चा करना आवश्यक हो जाता है। योग भारत द्वारा विश्व को दिए कई बहुमूल्य खजानों और धरोहरों में से एक है। कम से कम हजार वर्ष पूर्व उपनिषद काल में ऋषियों-महाऋषियों द्वारा योग का विज्ञान सिखाया जाता था, उसका अभ्यास किया जाता था। हजारों साल बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सतत् और अथक प्रयासों से योग पुन प्रतिष्ठित हुआ है। अब तेजी से विश्व स्तर पर लोगों का झुकाव इस ओर हो रहा है। संस्कृत शब्द युग से उत्पन्न योग, मनुष्य व परमात्मा को जोड़ने के विज्ञान के रूप में परिभाषित है। वास्तव में योग शरीर व मन को स्वस्थ एवं शांत रखने का अभ्यास व प्रशिक्षण है। वह लोग जो इस यात्रा को पूरी तरह तय करने को तैयार होते हैं, वह अंतत योग के माध्यम से अपनी चेतना के मूल में छिपे उस दिव्य तत्व को पहचानने में भी समर्थ होते हैं। यही दिव्य अवस्था समाधि कहलाती है। समाधि की स्थिति की चर्चा संपूर्ण रूप से आध्यात्मिक विकास के इच्छुक कुछ विरले लोगों के लिए छोड़ते हुए, मैं अपना ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहता हूं कि जो लोग अध्यात्म व आत्मविश्वास संबंधी (मेरा फिजिकल) बातों में रुचि नहीं रखते, उनके लिए भी योग बेहतर शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य की ओर जाने का सही रास्ता है। आधुनिक विज्ञान ने भी इसे स्वीकार किया है। कुछ वर्ष पूर्व ही विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण को मनुष्य के स्वास्थ्य के एक अभिन्न अंग के रूप में स्वीकार किया है, जबकि इस अवधारणा में योगियों का विश्वास हजारों वर्षों से रहा है। यह सभी उम्र के लोगों के लिए शांति प्रदान करने का कृत्य है।
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