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Friday, 4 June 2021
सऊदी अरब ः मस्जिदों को लाउडस्पीकर धीमा रखने के आदेश
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस (शासक) मोहम्मद बिन सलमान ने सभी मस्जिदों को अजान या अन्य मौकों पर लाउडस्पीकर धीमा रखने का आदेश दिए हैं। सभी मस्जिदों से कहा गया है कि वह लाउडस्पीकर की आवाज क्षमता से एक-तिहाई कम रखें। सऊदी अरब में इस्लामिक मामलों के मंत्री डॉक्टर अब्दुल लतीफ बिन अब्दुल्ला अजीज अल-शेख ने पिछले सप्ताह ही इन प्रतिबंधों की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि मस्जिदों में लगे लाउडस्पीकर की आवाज को अधिकतम आवाज के एक-तिहाई से ज्यादा नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों से लगातार मिल रही शिकायतों के बाद यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया थाöउन्हें भी ऐसी शिकायतें मिलीं, जिनमें कुछ अभिभावकों ने लिखा कि लाउडस्पीकर की तेज आवाज से बच्चों की नींद खराब होती है। अपने आदेश में डॉक्टर अब्दुल लतीफ बिन अब्दुल्ला अजीज अल-शेख ने लिखाöमस्जिदों पर लगे लाउडस्पीकर का प्रयोग सिर्फ धर्मांवलंबियों को नमाज के लिए बुलाने (अजान के लिए) और इकामत (नमाज के लिए लोगों को दूसरी बार पुकारने) के लिए किया जाए और उनकी आवाज स्पीकर की अधिकतम आवाज के एक-तिहाई से ज्यादा न हो। उन्होंने इस आदेश का न मानने वालों के खिलाफ प्रशासन की ओर से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस्लाम धर्म को मानने वालों के अनुसार अजान और इकामत का मकसद लोगों को यह बताना होता है कि इमाम अपने स्थान पर बैठ चुके हैं और नमाज बस शुरू होने वाली है। इस्लामिक मामलों के मंत्रालय ने इस आदेश के पीछे शरीयत की दलील दी है। कहा गया है कि सऊदी प्रशासन का यह आदेश पैगम्बर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद की हिदायतों पर आधारित है। जिन्होंने कहा कि हर इंसान चुपचाप अपने रब को पुकार रहा है। इसलिए किसी दूसरे को परेशान नहीं करना चाहिए और न ही पाठ में या प्रार्थना में दूसरे की आवाज पर आवाज उठानी चाहिए। सऊदी प्रशासन ने अपने आदेश में तर्क दिया है कि इमाम नमाज शुरू करने वाले हैं, इसका पता मस्जिद में मौजूद लोगों को चलना चाहिए न कि पड़ोस के घरों में रहने वाले लोगों को। यह बल्कि कुरान शरीफ का अपमान है कि आप उसे लाउडस्पीकर पर चलाएं और कोई उसे सुनना चाहे या न चाहे। इस सन्दर्भ में पहले एक वरिष्ठ धार्मिक नेता मोहम्मद बिन सालेह ने एक फतवा भी जारी किया था, जिसमें उन्होंने यही कहा था कि मस्जिदों पर लगे लाउडस्पीकरों का इस्तेमाल अजान और इकामत के अलावा नहीं किया जाना चाहिए। बीबीसी की इस रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब में धर्म के कई बड़े जानकारों ने सरकार के इस आदेश को सही ठहराया है। जबकि अधिकांश रूढ़िवादी मुसलमान सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर इसके खिलाफ अभियान चला रहे हैं। सरकार ने यह प्रतिबंध ऐसे दौर में लगाया है, जब क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान सऊदी अरब को एक उद्धार देश बनाने का प्रयास कर रहे हैं। वह चाहते हैं कि सामान्य जनजीवन में धर्म की भूमिका सीमित रहे। कुछ महीने पहले ही सऊदी अरब में महिलाओं के कार चलाने पर से प्रतिबंध हटाया गया था जिसे एक बड़ा बदलाव माना जा रहा था। विरोध करने वालों से प्रशासन सख्ती से पेश आ रहा है, उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है और जेलों में डाला जा रहा है।
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