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Friday, 17 December 2021
चार धाम ः राष्ट्र रक्षा का पथ
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड में सामरिक रूप से अहम चार धाम प्रोजेक्ट का ऑल वेदर रोड के चौड़ीकरण का रास्ता साफ कर दिया। कोर्ट ने मंगलवार को ऑल वेदर को 5.5 मीटर की बजाय 10 मीटर चौड़ा बनाने की अनुमति दी। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने एक एनजीओ की याचिका में उठाई गईं आपत्तियों पर केंद्र सरकार को राहत दी। अब ऋषिकेश-बद्रीनाथ हाइवे, ऋषिकेश-गंगोत्री व टनकपुर-पिथौरागढ़ को दो-दो लेन बनाया जा सकेगा। कोर्ट ने कहा कि देश की रक्षा के लिए जरूरी परियोजनाओं की न्यायिक समीक्षा नहीं हो सकती। पीठ ने कहा है कि अदालत न्यायिक समीक्षा में सेना के सुरक्षा संस्थानों के बारे में फैसला नहीं कर सकती। उसने यह भी कहा कि सड़क की चौड़ाई बढ़ाने में रक्षा मंत्रालय की कोई दुर्भावना नहीं छिपी है। जून 2013 में केदारनाथ में आई आपदा के करीब तीन साल बाद 2016 में प्रधानमंत्री मोदी ने इस बारहमासी सड़क परियोजना की आधारशिला रखी थी। उत्तराखंड स्थित चार धामोंöगंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ को जोड़ने वाली करीब 900 किलोमीटर लंबी सड़क परियोजना के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग की चौड़ाई को दोगुना कर 10 मीटर करने के फैसले को इस आधार पर चुनौती दी गई थी कि इससे उत्तराखंड के पर्यावरण को नुकसान हो सकता है। चार धाम यात्रा परियोजना सिर्फ धार्मिक कारणों से ही नहीं बल्कि रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। निश्चय ही सुरक्षा हितों के साथ ही पर्यावरण को होने वाले नुकसान की अनदेखी नहीं की जा सकती। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण संबंधी उपायों को सुनिश्चित करने के लिए पूर्व न्यायाधीश एके सीकरी के नेतृत्व में एक समिति का भी गठन किया है। ऐसे में इस परियोजना को आगे बढ़ाते हुए सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और पर्यावरण से जुड़े हितों के बीच संतुलन बना रहे।
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