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Tuesday, 21 December 2021
अब 21 वर्ष होगी लड़कियों की शादी की उम्र
देश में लड़कियों की शादी की कानूनी उम्र 21 साल होने जा रही है। संसद में जारी गतिरोध के बीच केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लड़कियों की शादी की वैधानिक उम्र 18 वर्ष से बढ़ाकर लड़कों की तरह 21 वर्ष करने से संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। केंद्र सरकार बाल विवाह निषेध कानून 2006 में इस आशय का संशोधन करने के लिए संसद के इसी सत्र में विधेयक ला सकती है। न्यूनतम उम्र सीमा के बदलाव का यह फैसला जया जेटली समिति की सिफारिशों के आधार पर किया गया है। पिछले साल गठित इस समिति को यह देखना था कि शादी और मातृत्व की उम्र का मां और नवजात शिशु के स्वास्थ्य और विभिन्न हेल्थ इडिकेटर्स जैसे शिशु मृत्यु दर, मातृत्व मृत्यु दर इत्यादि पर कैसा और कितना संबंध है? यह लैंगिक समानता की दिशा में वाकई अहम कदम है। प्रधानमंत्री मोदी ने 2020 में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से दिए अपने भाषण में इसकी घोषणा की थी। यह कदम इस लिहाज से भी अहम है, क्योंकि करीब 13 वर्ष पहले विधि आयोग ने लड़के और लड़कियों, दोनों के लिए शादी की कानूनी उम्र 18 साल करने की सिफारिश कर दी थी। अपने आपमें यह सुझाव प्रगतिशील है। आज जब हर क्षेत्र में लड़कों और लड़कियों को लेवल प्लेइंग फील्ड मुहैया कराने की कोशिश हो रही है, तब कोई कारण नहीं कि विवाह की न्यूनतम उम्र को लेकर दोनों में भेदभाव किया जाए। 18 साल की उम्र तक तो कॉलेज की पढ़ाई भी पूरी नहीं होती। ऐसे में अगर लड़कों को अपनी पढ़ाई पूरी कर खुद को अच्छी नौकरी के लिए तैयार करने का मौका मिलता है तो लड़कियों को तीन साल पहले ही शादी के झंझट में डाल देने की वकालत भला कैसे की जा सकती है? औपनिवेशक शासन ने सितम्बर 1929 में बाल विवाह निरोधक कानून बनाकर लड़कियों के लिए शादी की न्यूनतम उम्र 14 वर्ष और लड़कों के लिए 18 वर्ष तय की थी। कहने की जरूरत नहीं कि यह कानून लंबे समय तक लड़कियों को शिक्षा से वंचित रखने की वजह बनी। आखिरकार 1978 में कानून में संशोधन के बाद लड़कियों के लिए शादी की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष और लड़कों की 21 वर्ष की गई। आज जब लड़कियां किसी भी क्षेत्र में लड़कों से कम नहीं तो शादी की उम्र में फर्क?
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