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Thursday, 6 May 2021
दिल्ली में चल रही हैं दो-दो सरकारें
राजधानी दिल्ली में उपराज्यपाल को ज्यादा अधिकार दिए जाने वाले कानून के लागू हो जाने पर राजधानी में एक अजीब-सी स्थिति बन गई है। जीएनसीटीडी (संशोधन) कानून 2021 की अधिसूचना जारी होने पर यहां कथित रूप से दो-दो सरकारें चल रही हैं। ऐसे में अधिकारों की इस जंग में दिल्ली सरकार के अधिकारी उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के बीच पिस रहे हैं। अगर मुख्यमंत्री व उनके मंत्री कोई फैसला लेते हैं तो अपनी संवैधानिक सर्वोच्चता के चलते फाइल उपराज्यपाल को भेजनी पड़ती है दूसरी ओर अधिकारियों में भ्रम की स्थिति बन रही है। सूत्रों की मानें तो आदेशों का पालन न करने पर अधिकारियों को दिल्ली सरकार के मंत्रियों की डांट खानी पड़ रही है। कोरोना काल में अधिकारों की यह जंग तब ज्यादा खतरनाक हो जाती है जब एलजी और मुख्यमंत्री को लोगों की जान बचाने के लिए एक साथ मिलकर काम करना चाहिए लेकिन वह एक-दूसरे से अलग जाते दिख रहे हैं। कोरोना प्रबंधन के मोर्चे पर केजरीवाल सरकार अलग चल रही है तो एलजी अपनी अलग बांह पकड़े हुए हैं। लेकिन इस तरह की स्थिति से आखिरकार नुकसान दिल्ली के लोगों का ही हो रहा है। एक ओर केजरीवाल दिल्ली में ऑक्सीजन की किल्लत की बात कर रहे हैं तो एलजी ने लोगों को सरल व सुलभ तरीके से ऑक्सीजन उपलब्ध कराने के लिए ऑक्सीजन कंट्रोल रूम की शुरुआत की है। जिस हैल्पलाइन पर कोई भी व्यक्ति कॉल करके सिलेंडर ले सकता है या अपना सिलेंडर भरवा सकता है। ऐसे में दिल्ली वालों में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। दिल्ली में 18 साल से ज्यादा आयु वर्ग के लोगों को वैक्सीन दिए जाने पर सीएम व विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की तो एलजी ने मुख्य सचिव से वैक्सीनेशन की तैयारियों की रिपोर्ट मांगी। हालांकि एक मई को 18 साल से ज्यादा उम्र वाले लोगों के लिए दिल्ली में बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन नहीं हो सका। अब दिल्ली में बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन ड्राइव शुरू हो गई है। गौरतलब है कि कोरोना पर दिल्ली सरकार लगातार हाई कोर्ट से फटकार खा रही है। हाई कोर्ट कह रही है कि दिल्ली सरकार से जब नहीं संभल रहा है तो केंद्र को जिम्मेदारी क्यों नहीं दी जाती। इसके अलावा कोर्ट ने लगातार केजरीवाल सरकार को कोरोना से निपटने में अक्षम पाया है और फटकार लगाई है। इन दोनों पॉवर हाउसों के बीच दिल्ली की जनता पिस रही है। बुरा हाल है, न ऑक्सीजन मिल रही है, न बैड मिल रहे हैं, न दवाइयां उपलब्ध हैं और जिम्मेदार कोई नहीं?
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