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Sunday, 16 May 2021
कॉलर ट्यून का क्या फायदा, जब टीके ही नहीं
जब टीका ही नहीं है तो कौन टीका लगवाएगा? ऐसा न हो कि आप कोई एक कॉलर ट्यून तैयार कर लें और फिर 10 साल तक उसे चलाते रहें। आपको हालात देखते हुए उसके हिसाब से काम करना चाहिए। यह सवाल दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को उठाए, केंद्र के वकील के पास कोई जवाब नहीं था। जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रेखा पल्ली की बेंच की टीके की कमी को लेकर यह टिप्पणियां तब सामने आईं, जब वह कोरोना से भयभीत जनता के बीच जागरुकता लाए जाने के तरीकों के मुद्दे पर सुनवाई कर रहे थे। इसी बीच दिल्ली सरकार के सीनियर एडवोकेट राहुल मेहरा ने कहा कि अब जो भी लहर आएगी, उसका सबसे ज्यादा प्रभाव बच्चों और युवाओं पर पड़ने का अनुमान है। क्योंकि अब वही हैं जिन्हें टीका नहीं लगा है। मेहरा ने कहा कि उम्मीद करते हैं कि हम सबको शायद वैक्सीन लग जाए। अभी तक कोरोना से बचने का यही एक तरीका है। जस्टिस सांघी ने केंद्र के वकील के सामने सवाल खड़े किए। शुरुआत बच्चों के लिए कोरोना से बचाव के टीके को विकसित किए जाने से जुड़ी कोशिशों को लेकर हुई। जो जवाब मिला, उसी पर अदालत ने उक्त टिप्पणी की। बेंच ने कहाöलोग जब कॉल करते हैं तो हमें नहीं पता कि आप कितने दिनों से एक परेशान करने वाला संदेश सुना रहे हैं कि लोगों को टीका लगवाना चाहिए जबकि आपके पास (केंद्र सरकार) पर्याप्त टीका नहीं है। उन्होंने कहाöआप लोगों का टीकाकरण नहीं कर रहे हैं, लेकिन आप फिर भी कह रहे हैं कि टीका लगवाएं। कौन लगवाए टीका, जब टीका ही नहीं है। इस संदेश का मतलब क्या है। अदालत ने सुझाव दिया कि ऐसे वीडियो क्लिप, कॉलर ट्यूनस आदि तैयार करें जिसके जरिये जनता की भाषा में ही यह जानकारी जनता तक पहुंचाएं। आप इसके लिए टीवी एंकरों, गुलेरिया, त्रेहन जैसे नामी डॉक्टरों, फिल्म अभिनेताओं आदि से मदद ले सकते हैं। दिल्ली सरकार के वकील ने अमिताभ बच्चन का नाम लिया। इन सुझावों को संबंधित मंत्रालयों तक पहुंचाने के लिए सरकार ने वक्त मांगा।
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