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Sunday, 18 July 2021
फाइनल में गोल नहीं कर पाए तो गालियां
यूरोप की सबसे प्रतिष्ठित फुटबॉल प्रतियोगिता यूरो कप के फाइनल में मेजबान इंग्लैंड की टीम इटली से हार गई। एक बार फिर यूरो कप जीतने का उसका सपना टूट गया। वर्ष 1966 में विश्व कप जीतने के बाद पहली बार इंग्लैंड की टीम किसी बड़ी प्रतियोगिता के फाइनल में पहुंची थी। लंदन के मशहूर वेम्बले स्टेडियम में करीब 60 हजार दर्शकों के सामने हार के बाद इंग्लैंड के खिलाड़ी काफी मायूस, निराश और हताश दिखे। कई खिलाड़ी इतने भावुक हो गए कि वह अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए। खासकर उस स्थिति में जब इंग्लैंड की टीम ने दो मिनट के अंदर ही गोल करके इटली पर बढ़त बना ली थी। फाइनल मैच का फैसला पेनल्टी शूटआउट में हुआ, क्योंकि अतिरिक्त टाइम के बाद भी स्कोर 1-1 से बराबर था। पेनल्टी शूटआउट में इंग्लैंड की टीम पांच में से दो ही गोल कर पाई, जबकि इटली ने तीन गोल दागकर खिताब अपने नाम कर लिया। इंंग्लैंड की हार और इटली की जीत के अलावा यह फाइनल मैच फुटबॉल प्रशंसकों के हुड़दंग और फिर नस्लभेदी टिप्पणियों के कारण चर्चा में रहा। मैच शुरू होने से पहले वेम्बले स्टेडियम के बाहर जुटे सैकड़ों की संख्या में लोगों ने खूब हंगामा किया, मारपीट की और कई तो बिना टिकट के अंदर घुस गए। वेम्बले स्टेडियम के बाहर का नजारा इतना अव्यवस्थित था कि लोगों को पता ही नहीं था कि वहां हो क्या रहा है। वहीं मैच के बाद इंग्लैंड के जिन खिलाड़ियों ने पेनल्टी मिस की, वो निशाने पर आ गए। मार्क्स रशफोर्ड, जेहान साझो और बुकायो साफा ने पेनल्टी मिस की। मार्क्स रशफोर्ड ने बयान जारी कर कहा कि वह पेनल्टी मिस करने के लिए माफी मांगते हैं। लेकिन वह इसके लिए कभी माफी नहीं मांगेंगे कि वह क्या हैं? अपने बयान में 23 वर्षीय रशफोर्ड ने कहा कि मैं पूरे दिन अपने प्रदर्शन के लिए आलोचना सुन सकता हूं, मेरा पेनल्टी शॉट ठीक नहीं था। मुझे गोल करना चाहिए था, लेकिन मैं कभी भी इसके लिए माफी नहीं मांगूंगा कि मैं कौन हूं और कहां से आया हूं। मैं इंग्लैंड की जर्सी पहनकर गर्व महसूस करता हूं। इंग्लैंड के कप्तान हैरी केन ने कहा कि शरफोर्ड, साझो और साफा के खिलाफ नस्लभेदी टिप्पणी करने वाले इंग्लैंड के फैन नहीं हैं और हमें ऐसे लोगों की आवश्यकता भी नहीं है। हैरी केन ने ट्विटर पर लिखाöइन खिलाड़ियों को सहयोग और समर्थन की आवश्यकता है। नस्लभेदी टिप्पणी की नहीं, जो फाइनल की रात से की जा रही हैं। अगर आप सोशल मीडिया पर किसी को गाली दे रहे हैं तो आप इंग्लैंड के फैन नहीं हैं और हमें आपकी आवश्यकता नहीं। डिफेंडर टिरोन किंग्स ने ट्विटर पर लिखाöसुबह जागकर यह देखना भी मेरे भाई नस्लीय रूप से दुर्व्यवहार का सामना कर रहे हैं क्योंकि उन्होंने बहादुरी दिखाकर अपने देश को इस स्थिति में पहुंचाया है। यह बीमार मानसिकता है, लेकिन मुझे इससे आश्चर्य भी नहीं है। उन्होंने गृहमंत्री प्रीति पटेल की भी आलोचना की। पिछले महीने प्रीति पटेल ने उन खिलाड़ियों की आलोचना की थी, जो नस्लभेद के खिलाफ मैदान पर घुटनों के बल बैठे थे और इसे भाव प्रदर्शन की राजनीति कहा था। इंग्लैंड के मिड फील्डर ने कहा कि वह अपने साथी खिलाड़ियों के लिए की गई नस्लभेदी टिप्पणी से काफी निराश हैं। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने भी खिलाड़ियों के प्रति समर्थन जताया और नस्लभेदी टिप्पणियों की आलोचना की। उन्होंने कहाöवह देश के लिए खुशी लेकर आए हैं, जो उन पर नस्लभेदी टिप्पणी कर रहे हैं, उनके लिए मैं कहूंगाöतुम पर शर्म आती है।
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