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Sunday, 14 March 2021
लापरवाही कहीं भारी न पड़ जाए
देश में लगातार बढ़ रहे कोरोना के नए मामलों ने फिर से दिसम्बर के हालात पैदा कर दिए हैं। यह संख्या 23 दिसम्बर के बाद सबसे ज्यादा है। कुल मामले एक करोड़ 13 लाख के पार हो गए हैं। 24 घंटे में देश में 23,285 नए केस आए हैं। 117 मौतें हुई हैं। 15,157 लोग रिकवर हुए हैं। यानि कुल एक्टिव केस अब 1,97,237 यानि दो लाख से कुछ ही कम हैं। इधर दिल्ली में भी हालात बिगड़ते दिख रहे हैं। 61 दिन बाद दिल्ली में कल 400 से अधिक नए मामले आए। इस साल पहली बार एक्टिव मरीजों की संख्या दो हजार के पार पहुंच गई है। दिल्ली में संक्रमण रेट भी बढ़ा है। इससे अस्पतालों में एडमिट मरीजों की संख्या फिर से बढ़ने लगी है। लोक नायक अस्पताल के एक डाक्टर ने बताया कि जनवरी में ऐसे कई दिन थे, जब हमारे अस्पताल में कोविड का कोई नया मरीज भर्ती नहीं हुआ। लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में हर रोज पांच से छह मरीजों को भर्ती करना पड़ा। दिल्ली पिछले साल जून, सितम्बर और नवम्बर में पीक्स देख चुकी है। ऐसे में बढ़ते केसेज को देखते हुए राजधानी में कोरोना की चौथी वेव का खतरा बताया जा रहा है। एक्सपर्ट का कहना है कि जरूरी है कि राज्य टेस्टिंग, ट्रैकिंग और आइसोलेशन को लगातार जारी रखें और पॉजिटिव केस आने पर माइक्रो लेवल पर कंटेनमेंट जोन बनाकर संक्रमण की चेन को फैलने से रोकें। कई राज्यों ने तो अपने सबसे ज्यादा प्रभावित शहरों में फिर से लॉकडाउन लागू कर दिया है। एम्स के जाने-माने डाक्टर रणदीप गुलेरिया ने चेतावनी दी है कि अगर सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क के नियमों का पालन नहीं होता तो मामले और बढ़ सकते हैं। महामारी अभी खत्म नहीं हुई है। लेकिन लोगों की भीड़ रेस्तरां, सिनेमा घर जैसी जगहों पर जुटने लगी है। पार्टियां जोरों पर हो रही हैं, जिनमें फिजिकल डिस्टेंसिंग और मास्क जैसे प्रीवेंटेव कदमों का ध्यान नहीं रखा जाता।
आज के जमाने में जब डाक्टर मरीज को कहता है कि एमआरआई व सीटी स्कैन करवाकर आओ तो गरीब मरीज तो वहीं इतना घबरा जाता है कि अब इनके लिए पैसे
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